
मिशन लाइफ के तहत पर्यावरण संरक्षण की पहल, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को ई-कचरे के दुष्प्रभावों तथा सुरक्षित निपटान की दी गई जानकारी
नवगछिया। गोशाला रोड स्थित बाल भारती विद्यालय में बुधवार को शिक्षा विभाग के ‘इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ’ अभियान के अंतर्गत विशेष अभियान-6 के तहत ई-कचरा संग्रह एवं जिम्मेदार निपटान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे से होने वाले नुकसान, उसके उचित संग्रह और सुरक्षित निपटान के प्रति जागरूक करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देना था

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने-अपने घरों से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान तथा ई-कचरा लाकर विद्यालय में जमा किया। इस पहल के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि पुराने मोबाइल फोन, चार्जर, बिजली के तार और अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सामान्य कूड़े में फेंकना उचित नहीं है। इनका सुरक्षित संग्रह और अधिकृत पुनर्चक्रण केंद्र अथवा उपकरणों को दोबारा उपयोग योग्य बनाने वाली संस्था के माध्यम से उचित निपटान करना आवश्यक है।
विद्यालय में आयोजित इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ घरों में ई-कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
प्रार्थना सभा में ई-कचरा प्रबंधन पर हुई चर्चा
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की प्रार्थना सभा में ई-कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण विषय पर चर्चा के साथ हुई। इस अवसर पर छात्रा परिणति राज और स्वस्ति ने अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने ई-कचरे से होने वाले संभावित नुकसान तथा उसके जिम्मेदार तरीके से निपटान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कुछ हानिकारक पदार्थ मिट्टी, जल और पर्यावरण को प्रदूषित कर सकते हैं। यदि ऐसे कचरे को बिना उचित सावधानी के खुले में फेंका जाए या जलाया जाए, तो इससे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए ई-कचरे को दूसरे कचरे से अलग रखना और उसका सुरक्षित निपटान करना जरूरी है। बच्चों को यह भी बताया गया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत घर से ही की जा सकती है।
प्रशासक डी. पी. सिंह ने व्यवहार में बदलाव पर दिया जोर
विद्यालय के प्रशासक डी. पी. सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल जागरूक होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को घरों में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे को अलग रखने, उसे सुरक्षित रूप से एकत्र करने और उचित निपटान के प्रति अपने परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि बच्चे अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि प्रत्येक परिवार इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सामान्य कूड़े से अलग रखकर उसके उचित निपटान की व्यवस्था अपनाए, तो पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने लिया भाग
विद्यार्थियों की जानकारी बढ़ाने और विषय के प्रति उनकी समझ को परखने के उद्देश्य से ई-कचरा प्रबंधन पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता का संचालन विद्यालय के शिक्षक निखिल चिरानिया ने किया।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों से ई-कचरे के प्रकार, उससे होने वाले नुकसान, उसके संग्रह और सुरक्षित निपटान से संबंधित प्रश्न पूछे गए। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नों के उत्तर दिए और अपनी जानकारी का प्रदर्शन किया।
प्रश्नोत्तरी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को रोचक तरीके से पर्यावरण संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।
चित्रकला के माध्यम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के अंतर्गत चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए स्वच्छ पर्यावरण, ई-कचरा प्रबंधन और प्रकृति संरक्षण से जुड़े संदेशों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता के जरिए यह बताने का प्रयास किया कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित प्रबंधन कितना आवश्यक है। चित्रकला प्रतियोगिता ने बच्चों को अपनी रचनात्मकता के साथ पर्यावरण संबंधी विचारों को व्यक्त करने का अवसर दिया।
विद्यालय की ओर से आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक उपायों से जोड़ना था।
प्राचार्य नवनीत सिंह ने बताया सामूहिक जिम्मेदारी
विद्यालय के प्राचार्य नवनीत सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में सकारात्मक बदलाव लाकर प्रकृति के संरक्षण में योगदान दे सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने और उनके सर्वांगीण विकास में सहायक होते हैं।
प्राचार्य ने इस बात पर भी जोर दिया कि विद्यालय में सीखी गई अच्छी आदतों को विद्यार्थियों को अपने घर और समाज तक पहुंचाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।
घर-घर तक ई-कचरा प्रबंधन का संदेश पहुंचाने की पहल
इस अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि ई-कचरे का उचित प्रबंधन केवल विद्यालय या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिवार और समाज को इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
घर से अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक सामान एकत्र कर विद्यालय में जमा करने की पहल ने बच्चों को जिम्मेदार उपभोग, कचरे के पृथक्करण और सुरक्षित निपटान के महत्व को समझने का अवसर दिया। साथ ही, विद्यार्थियों को यह सीख मिली कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता दोनों आवश्यक हैं।
बाल भारती विद्यालय की इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वच्छता, प्रकृति संरक्षण और ई-कचरे के सुरक्षित निपटान के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने बच्चों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और उसे व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी।















