
@ नॉर्थ सिक्किम के दुर्गम रास्तों पर दिखाया दमखम, गुरुडोंगमार लेक और जीरो प्वाइंट तक मोटरसाइकिल से पहुंचा दल
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बर्फीली हवाएं, शून्य से नीचे का तापमान और विरल हवा में हर सांस के लिए मशक्कत। ऐसी दुश्वारियों के बीच भागलपुर के आठ बाइकर्स ने अपने हौसले से रास्ता बनाया और नॉर्थ सिक्किम की ऊंची पहाड़ियों पर कामयाबी का परचम लहराकर लौटे। 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुडोंगमार लेक और 15,500 फीट ऊंचे जीरो प्वाइंट तक मोटरसाइकिल से पहुंचने वाले इस दल के अभियान में एक उपलब्धि विशेष रूप से दर्ज हुई। नवविवाहित आर्या पांडेय इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को पूरा करने वाली भागलपुर की पहली महिला सहभागी बनीं।

18 अक्टूबर को भागलपुर से शुरू हुआ यह अभियान 24 अक्टूबर को सभी आठ सदस्यों की सकुशल वापसी के साथ संपन्न हुआ। अभियान का नेतृत्व पंजाब एंड सिंध बैंक के सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक शैलेंद्र कुमार ने किया। दल ने रास्ते की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कम ऑक्सीजन जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए दोनों प्रमुख स्थलों तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
दल 20 अक्टूबर को लाचेन पहुंचा। अगले दिन सुबह राइडर्स ने 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुडोंगमार लेक की ओर प्रस्थान किया। भारत-चीन सीमा के निकट स्थित इस दुर्गम क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर कम होने और कड़ाके की ठंड के कारण यात्रा बेहद चुनौतीपूर्ण रही। ऐसे हालात में संतुलित राइडिंग, सतर्कता और धैर्य ही आगे बढ़ने का सहारा बने।गुरुडोंगमार लेक तक पहुंचने के बाद दल ने अपना अगला पड़ाव लाचुंग बनाया। 22 अक्टूबर को राइडर्स ने 15,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित जीरो प्वाइंट यानी युमेसमडोंग तक भी मोटरसाइकिल से पहुंचकर अभियान का दूसरा प्रमुख लक्ष्य पूरा किया।
इस यात्रा में प्रतीक पांडेय और उनकी नवविवाहित पत्नी आर्या पांडेय की सहभागिता खास रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आर्या भागलपुर की पहली महिला सहभागी बनीं, जिन्होंने मोटरसाइकिल से नॉर्थ सिक्किम के इन दोनों चुनौतीपूर्ण स्थलों की यात्रा पूरी की। विरल हवा, जमा देने वाली ठंड और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच आर्या ने जिस धैर्य और दृढ़ता के साथ यात्रा पूरी की, उसने अभियान को एक अलग पहचान दी।
अभियान के दौरान फोटोग्राफर अमित कुमार राय ने पहाड़ों के विहंगम दृश्यों और दल के साहसिक सफर के यादगार क्षणों को कैमरे में संजोया। दोनों लक्ष्य हासिल करने के बाद दल ने 23 अक्टूबर को वापसी शुरू की और गंगटोक में रात्रि विश्राम किया। इसके बाद 24 अक्टूबर को बागडोगरा के रास्ते सभी आठ सदस्य सकुशल भागलपुर लौट आए। उनकी यह यात्रा शहर के बाइकिंग प्रेमियों के लिए एक यादगार उपलब्धि बन गई।
















