
नाथनगर के ऐतिहासिक मैदान में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए गए; जिला स्कूल परिसर में भी उमड़ी हजारों लोगों की भीड़, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा शहर
भागलपुर। असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी का पर्व बुधवार को भागलपुर में उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के विभिन्न स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे। कहीं 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया, तो कहीं लगभग 18 वर्षों के अंतराल के बाद शहर के मध्य हिस्से में दशहरा की पुरानी परंपरा फिर से जीवंत हुई। पुतलों के दहन के दौरान पटाखों की गूंज और भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

नाथनगर के ऐतिहासिक सीटीएस मैदान और जिला स्कूल परिसर में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे। दोनों स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग अपने परिवार के साथ पहुंचे और विजयादशमी का उत्सव मनाया।
सीटीएस मैदान में जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने किया पुतलों का दहन
नाथनगर के ऐतिहासिक कर्णगढ़ मैदान में रामलीला समिति गोलदार पट्टी की ओर से पारंपरिक रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां लगभग 30 फीट ऊंचे रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी बनाए गए थे।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने रावण, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद यादव ने कुंभकरण और अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने मेघनाद के पुतले का दहन किया। पुतलों में आग लगते ही मैदान में मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आतिशबाजी और उत्साह के बीच पूरा मैदान गूंज उठा।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए रावण दहन को सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ समाज में मेल-मिलाप और एकता को भी मजबूत करते हैं।

वरीय पुलिस अधीक्षक ने बताया कि दुर्गा पूजा और दशहरा के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस बल के साथ विशेष बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
जिला स्कूल परिसर में भी रावण दहन, जयकारों से गूंजा मैदान
भागलपुर के जिला स्कूल परिसर में भी विजयादशमी के अवसर पर भव्य रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां हजारों की संख्या में लोग जुटे। अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों में अग्नि प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इससे पहले नगर विधायक रोहित पांडेय, महापौर डॉ. वसुंधरा लाल, भाजपा जिलाध्यक्ष संतोष कुमार और पार्षद अश्विनी जोशी मोंटी सहित अन्य अतिथियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे स्थानीय पार्षद नंदिकेश शांडिल्य ने अतिथियों का स्वागत किया।
आयोजन स्थल पर भगवान श्रीराम की आकर्षक झांकी सजाई गई थी। सुरताल दल के कलाकारों ने श्रीराम और मां दुर्गा के भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बनाया। जैसे ही मेघनाद के पुतले में आग लगाई गई, पटाखों की आवाज से पूरा परिसर गूंज उठा। इसके बाद कुंभकरण और फिर रावण का पुतला कुछ ही मिनटों में जलकर राख हो गया। इस दृश्य को देखने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ उत्साह व्यक्त किया।
वर्ष 2008 के बाद शहर के मध्य में फिर शुरू हुआ रावण दहन
जिला स्कूल परिसर में आयोजित रावण दहन का इस बार विशेष स्थानीय महत्व रहा। वर्ष 2008 के बाद पहली बार भागलपुर शहर के मध्य हिस्से में इस परंपरा को फिर से शुरू किया गया। स्थानीय पार्षद नंदिकेश शांडिल्य के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने आयोजन को सफल बनाने में भागीदारी निभाई।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले लाजपत पार्क में रामलीला और रावण दहन का आयोजन भव्य रूप से किया जाता था। लाजपत पार्क दुर्गा मंदिर परिसर में वर्ष 1953 से मां दुर्गा की पूजा और प्रतिमा स्थापना की परंपरा चली आ रही है। वर्ष 2008 में हुए विवाद के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से स्थानीय प्रशासन ने वहां रावण दहन बंद करने का निर्णय लिया था।
ऐसे में लंबे अंतराल के बाद शहर के मध्य हिस्से में रावण दहन का आयोजन स्थानीय लोगों के लिए खास रहा। इस पहल के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को फिर से आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई दिया।
नाथनगर में लगभग 150 वर्षों से चली आ रही है परंपरा
नाथनगर के सीटीएस मैदान परिसर में रावण दहन की परंपरा लगभग 150 वर्षों पुरानी बताई जाती है। सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी के अनुसार, यहां दशहरा के अवसर पर बड़े स्तर पर रामलीला का मंचन और रावण दहन किया जाता है। इस आयोजन को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं।
इस वर्ष भी हजारों लोगों की उपस्थिति ने आयोजन के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को दर्शाया। रामलीला समिति, पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से यह कार्यक्रम क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भागलपुर के शहरी क्षेत्र में मां दुर्गा की 11 और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। बंगाली परंपरा के अनुसार स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को किया गया, जबकि अन्य प्रतिमाओं की विसर्जन शोभायात्रा शुक्रवार को निकाले जाने की जानकारी दी गई।
भीड़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा के विशेष इंतजाम
दोनों प्रमुख आयोजन स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। सीटीएस मैदान में पुलिस बल की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी। लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए मैदान के दोनों प्रवेश द्वार खुले रखे गए थे।
आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन वाहन और एंबुलेंस भी तैनात रखे गए थे। आयुर्वेदिक कॉलेज से सीटीएस मार्ग के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई, ताकि भीड़ के बीच आवागमन प्रभावित न हो।
नाथनगर थानाध्यक्ष परमेश्वर सहनी और ललमटिया थानाध्यक्ष बिपिन कुमार पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में जुटे रहे। कार्यक्रम में नगर पुलिस अधीक्षक अतुलेश झा, सीटीएस के प्राचार्य, नगर पुलिस उपाधीक्षक-द्वितीय राकेश कुमार, नाथनगर के अंचलाधिकारी मनोहर कुमार, नाथनगर सार्वजनिक पूजा समारोह समिति के अध्यक्ष पप्पू यादव, महामंत्री देवाशीष बनर्जी तथा रामलीला समिति के रवींद्र प्रसाद भगत, हरि प्रसाद भगत और जितेंद्र भगत सहित कई लोग मौजूद रहे।
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने भागलपुर में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता की झलक प्रस्तुत की। रावण दहन के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि जीवन में सत्य, सदाचार और न्याय के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ी विजय है।















