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नवगछिया। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के दौरान गंगा पार आवागमन की व्यवस्था संभालने वाले नाविक आज अपने बकाया भुगतान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। नाव संचालकों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा निर्धारित भुगतान का एक बड़ा हिस्सा अब तक नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।

गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु पर यातायात प्रभावित होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच हजारों यात्रियों के आवागमन की जिम्मेदारी नाविकों ने संभाली थी। उस दौरान गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के लिए नावों का संचालन किया गया था। प्रारंभ में नाव चालक यात्रियों से प्रति व्यक्ति 50 रुपये किराया लेते थे, लेकिन बाद में बिहार सरकार के निर्देश पर यात्रियों की सुविधा को देखते हुए नाव सेवा को पूरी तरह नि:शुल्क कर दिया गया।

इसके बाद प्रशासन द्वारा नावों का पंजीकरण कराया गया और नाव संचालकों के साथ यह व्यवस्था बनाई गई कि यात्रियों से किराया लेने के बजाय प्रति फेरा प्रत्येक नाव को 150 रुपये का भुगतान किया जाएगा। प्रशासनिक निर्देश के तहत एक जून से सात जून तक नाविकों ने नि:शुल्क सेवा देते हुए हजारों यात्रियों को सुरक्षित गंगा पार पहुंचाया।

नाव संचालकों का आरोप है कि सेवा समाप्त होने के कई सप्ताह बाद भी उन्हें निर्धारित भुगतान नहीं मिल पाया है। सहोड़ा निवासी नाव संचालक राजीव कुमार ने बताया कि कई नाविकों का भुगतान अब तक लंबित है। बकाया राशि की मांग को लेकर वे लगातार संबंधित कार्यालयों का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

रामदियरी निवासी राजू मांझी, मंटू मांझी, इंदल मंडल तथा बख्तियारपुर के अजय महतो और प्रकाश महतो ने भी प्रशासन पर भुगतान में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब वे खरीक अंचल कार्यालय में भुगतान संबंधी जानकारी लेने पहुंचते हैं तो उन्हें अनुमंडल कार्यालय भेज दिया जाता है, जबकि अनुमंडल कार्यालय में भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। इससे नाविकों में असंतोष और नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

नाव संचालकों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के अनुरोध पर जनहित में नि:शुल्क सेवा दी थी और कठिन परिस्थितियों में हजारों लोगों को राहत पहुंचाई थी। ऐसे में समय पर भुगतान नहीं मिलना उनके साथ अन्याय है। अधिकांश नाविकों की आजीविका नाव संचालन पर ही निर्भर है और भुगतान लंबित रहने के कारण उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं।

नाविकों ने प्रशासन से अविलंब बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो सभी नाविक एकजुट होकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे ।

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