


@ इधर, देवघर नगर निगम के मेयर रवि कुमार रावत शिवभक्त मिथिलेश कुमार से मिलने पहुंचे और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने मिथिलेश कुमार के साथ समय बिताया और उनकी नन्हीं परी को गोद में लेकर काफी देर तक दुलार किया। 24 दिनों में यात्रा हुई पूरी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। श्रद्धा जब संकल्प बन जाए और उस संकल्प के साथ बेटी के प्रति प्रेम जुड़ जाए, तो आस्था की राह भी एक प्रेरक कहानी बन जाती है। श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से बाबाधाम तक जाने वाले कच्चे कांवरिया पथ पर इन दिनों ऐसी ही एक मार्मिक तस्वीर श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। मुजफ्फरपुर निवासी मिथिलेश कुमार अपनी महज दो माह की बेटी को डोली में बिठाकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। उनकी इस यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज में बेटी के सम्मान और उसके महत्व का भावपूर्ण संदेश भी दिया।
इधर, देवघर नगर निगम के मेयर रवि कुमार रावत शिवभक्त मिथिलेश कुमार से मिलने पहुंचे और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने मिथिलेश कुमार के साथ समय बिताया और उनकी नन्हीं परी को गोद में लेकर काफी देर तक दुलार किया।
मिथिलेश कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन के दौरान मनोकामना की थी। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि उनके घर बेटी का जन्म हुआ तो वे अगली श्रावणी में अपनी नवजात बेटी को साथ लेकर दंडवत यात्रा करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचेंगे। समय बीता और वर्ष 2026 में उनके घर बेटी ने जन्म लिया। बेटी के जन्म के साथ ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई और मिथिलेश ने अपने पुराने संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया।
इसके बाद शुरू हुई पिता की कठिन तपस्या। कच्चे कांवरिया पथ पर वे बार-बार दंडवत करते हुए आगे बढ़ते रहे और उनकी दो माह की नन्हीं बेटी डोली में उनके साथ चलती रही। रास्ते में जब श्रद्धालुओं की नजर इस दृश्य पर पड़ती तो वे कुछ पल के लिए ठिठक जाते। एक ओर पिता का कठिन व्रत और दूसरी ओर डोली में सुकून से लेटी नन्हीं बच्ची – यह दृश्य लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।
बेटी को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया। डोली में पंखे, लाइट और सौर ऊर्जा से संचालित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। पिता की कोशिश थी कि आस्था की इस कठिन यात्रा का असर उनकी नन्हीं बच्ची की सुविधा पर न पड़े।
मिथिलेश कुमार बताते हैं कि मुझे कोई बहन नहीं है। बहना की कमी खूब खलती थी। उनके परिवार में पहले से एक पुत्र है, लेकिन बेटी के जन्म के बाद उन्हें लगा कि उनका परिवार अब पूर्ण हुआ है। यही भाव उनकी यात्रा में भी दिखाई दिया। उनके लिए यह केवल बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धा का सवाल नहीं था, बल्कि अपनी बेटी के जन्म को उत्सव और गौरव के रूप में स्वीकार करने का भी संकल्प था।

देवघर में हुआ भावपूर्ण स्वागत:
दंडवत यात्रा पूरी कर जब मिथिलेश कुमार अपनी नन्हीं बेटी के साथ देवघर पहुंचे तो उनके इस अनूठे संकल्प की जानकारी पाकर लोगों ने उनका भावपूर्ण स्वागत किया। प्रजापति समाज की ओर से लाडली बिटिया और उसके माता-पिता पर पुष्प वर्षा कर उनका सम्मान किया गया। फूलों की बारिश के बीच बच्ची के माता-पिता को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान मौजूद लोगों ने पिता की श्रद्धा के साथ-साथ बेटी के प्रति उनके प्रेम और सम्मान की भी सराहना की। नन्हीं बच्ची पर फूल बरसते देख वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर भी खुशी और भावुकता साफ झलक रही थी। ऐसा लगा मानो समाज की ओर से उस नन्हीं बेटी के जन्म का सामूहिक रूप से अभिनंदन किया जा रहा हो।
आस्था के साथ ‘बेटी सम्मान’ का संदेश
मिथिलेश कुमार की यह यात्रा कई मायनों में अलग है। दंडवत यात्रा जहां उनकी धार्मिक आस्था और संकल्प की दृढ़ता को दर्शाती है, वहीं दो माह की बेटी को साथ लेकर बाबाधाम पहुंचना समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी छोड़ गया।
यह संदेश कि बेटी किसी परिवार की जिम्मेदारी भर नहीं, बल्कि परिवार की खुशी, पूर्णता और गौरव का प्रतीक है। जिस समाज में आज भी कई जगह बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की मानसिकता देखने को मिलती है, वहां एक पिता का अपनी बेटी के जन्म पर संकल्प लेना और उसे पूरा करने के लिए इतनी कठिन यात्रा करना निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।
कच्चे कांवरिया पथ पर यह यात्रा देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मिथिलेश कुमार केवल एक कांवरिया नहीं रहे, बल्कि वे उस पिता की तस्वीर बन गए, जिसने अपनी बेटी को अपनी आस्था के केंद्र में रखा। देवघर में पुष्प वर्षा से हुआ सम्मान इस भावना को और मजबूत करता है कि बेटी के जन्म पर खुशियां मनाना और उसे सम्मान देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पूरा हुआ यह संकल्प अब केवल एक परिवार की धार्मिक यात्रा नहीं रहा। यह एक ऐसी भावुक कहानी बन गया है, जिसमें पिता की आस्था, बेटी के प्रति प्रेम और समाज के बदलते नजरिए – तीनों एक साथ दिखाई देते हैं।
















