


नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है। आज रविवार की संध्या करीब 5 बजे सड़क दुर्घटना में घायल छह लोगों को आनन-फानन में घटना स्थल से नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। इनमें से पांच की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही थी और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी।

आरोप है कि जिस समय घायल मरीज इलाज के लिए तड़प रहे थे, उस समय इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. अफजल हुसैन अस्पताल परिसर में बच्चों के साथ क्रिकेट खेलने में व्यस्त थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी अन्य स्टाफ को सौंप दी और स्वयं मौके से हट गए।
इस पूरी घटना का वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
लापरवाही का लंबा इतिहास, कार्रवाई शून्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। संबंधित चिकित्सक पर पूर्व में भी इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान लापरवाही, अनुपस्थिति और मरीजों के प्रति उदासीन रवैये के कई आरोप लग चुके हैं। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनके मनोबल में लगातार वृद्धि हो रही है।
“सुविधा नहीं है” कहकर मरीजों को किया जाता है रेफर
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यहां गंभीर मरीजों को अक्सर “सुविधा उपलब्ध नहीं है” कहकर तुरंत रेफर कर दिया जाता है। कई मामलों में अगर परिजन उपस्थित नहीं हो तो ठीक से प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया जाता, जिससे मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। लोगों का कहना है कि यह प्रवृत्ति अब सामान्य होती जा रही है।

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अस्पताल के बाहर सक्रिय दलालों का नेटवर्क?
अस्पताल परिसर के बाहर कथित रूप से सक्रिय दलालों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये लोग मरीजों को गुमराह कर निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। इस तरह के कई वीडियो पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।
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जवाबदेही पर सवाल, व्यवस्था पर संकट
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं न केवल अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर भी गंभीर चिंतन की जरूरत बताती हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस संबंध में नवगछिया अनुमंडल पदाधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। वहीं भागलपुर के सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद से भी कई बार संपर्क का प्रयास असफल रहा।















