


नवगछिया अनुमंडल अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में रविवार की देर शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक संदिग्ध युवक द्वारा घायल बच्ची को सुई देने की कोशिश का मामला सामने आया। हैरानी की बात यह है कि उक्त युवक न तो डॉक्टर था और न ही अस्पताल का कोई अधिकृत कर्मी, इसके बावजूद वह लंबे समय से इमरजेंसी में सक्रिय नजर आ रहा था।
जानकारी के अनुसार, छत से गिरकर घायल हुई एक बच्ची को उसके परिजन इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान इमरजेंसी में मौजूद एक संदिग्ध युवक ने खुद ही इलाज शुरू करने का प्रयास किया और बच्ची को सुई देने के लिए आगे बढ़ गया। परिजनों को जब उस पर संदेह हुआ और उन्होंने पूछताछ की, तब पता चला कि वह न तो डॉक्टर है और न ही अस्पताल का कर्मचारी। यह जानकर परिजनों के होश उड़ गए और वहां अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उक्त युवक काफी देर से इमरजेंसी कक्ष में बैठा था और मरीजों को बुलाने व संभालने जैसा व्यवहार कर रहा था। वह लोगों को बरगलाने की कोशिश भी कर रहा था, जिससे कई लोग भ्रमित हो रहे थे। सबसे गंभीर बात यह है कि यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो गई है, जिससे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।
स्थिति बिगड़ती देख तत्काल अस्पताल की ईएमटी (आपातकालीन चिकित्सा टीम) को बुलाया गया, जिसके बाद बच्ची का सही तरीके से इलाज किया गया। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब परिसर में हाई-टेक सीसीटीवी निगरानी होने का दावा किया जाता है।
वहीं, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार ने बताया कि उक्त युवक को वे नहीं जानते हैं और उनके अनुसार वह इलाज नहीं कर रहा था, बल्कि पास में खड़ा था। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और सीसीटीवी फुटेज इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को सख्त करने, इमरजेंसी में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने तथा दोषी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।













