


@ नर्सरी में लगे लाखों पौधों की अकाल मौत हो चुकी है। वहीं फलदार पेड़ों का भी हाल बुरा हो चुका है। ग्रोथ घटेगा,फल आने कम हो जाएंगे। किसान से लेकर कारोबारी तक चिंतित हैं। बाढ़ से एक्सपोर्ट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है।भागलपुर जिले में जर्दालु आम की बागवानी करीब 2,000 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और सीजन में इसकी पैदावार लगभग 11 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचती है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बिहार की वैश्विक पहचान बन चुके जीआई टैग प्राप्त भागलपुरी जर्दालु आम पर इस बार गंगा नदी की बाढ़ का असर पड़ने की आशंका है। भागलपुर जिले में जर्दालु आम की बागवानी करीब 2,000 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और सीजन में इसकी पैदावार लगभग 11 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचती है। इनमें बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट क्वालिटी का जर्दालु आम भी शामिल होता है। ऐसे में गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति ने आम उत्पादकों के साथ-साथ कारोबारियों और निर्यात से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
मैंगो मैन अशोक चौधरी कहते हैं 2016 से ही भागलपुर के इलाके में बाढ़ के प्रकोप से आम के पौधों को नुकसान हो रहा है। इस बार बाढ़ का पानी कुछ दिन ज्यादा नर्सरी में टिकेगा। मेरे नर्सरी में अभी तक एक लाख पौधों की अकाल मौत हो चुकी है।फलदार पेड़ों का भी हाल बुरा हो चुका है। इसका ग्रोथ घटता चला जाएगा। फल आने कम हो जाएंगे। किसान से लेकर कारोबारी तक चिंतित हैं।बाढ़ से एक्सपोर्ट क्वालिटी पर असर पड़ सकता है। महज सात-आठ दिन भी बाढ़ का पानी नर्सरी व फलदार पेड़ों के नीचे टिका रहता है तो भविष्य के खतरे की घंटी बज उठती है।
जर्दालु आम अपनी खास खुशबू, स्वाद, पतले छिलके और रसीले गूदे के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। भागलपुर की पहचान से जुड़े इस आम को भौगोलिक संकेत (GI) टैग मिल चुका है, जिसके कारण इसकी विशिष्टता और बाजार में ब्रांड वैल्यू और मजबूत हुई है। आम की मांग बिहार के अलावा देश के दूसरे राज्यों में भी रहती है तथा बेहतर गुणवत्ता वाले फलों की आपूर्ति बाहरी बाजारों तक की जाती है।

करीब 2,000 एकड़ में फैले हैं जर्दालु के बागान:
हजार मीट्रिक टन की मौसमी पैदावार और करीब 2,000 एकड़ के बागान क्षेत्र के साथ भागलपुर का जर्दालु आम हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ा है।पिछले वर्षों में जर्दालु के रकबे में वृद्धि हुई है। राज्य सरकार के स्तर पर आम की इस विशिष्ट प्रजाति को बढ़ावा दिए जाने के बाद किसानों का रुझान भी बागवानी की ओर बढ़ा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में बागवानी और जर्दालु आम को प्रोत्साहन मिलने के साथ इसके उत्पादन क्षेत्र में विस्तार की बात सामने आती रही है।
जर्दालु के बढ़ते रकबे ने स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी बढ़ाए हैं। आम के उत्पादन से लेकर तुड़ाई, छंटाई, पैकेजिंग, परिवहन और बाजार तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में बड़ी संख्या में लोग जुड़े रहते हैं।
बाढ़ से एक्सपोर्ट क्वालिटी पर पड़ सकता है असर:
इस बार गंगा में बाढ़ की स्थिति जर्दालु आम के कारोबार के लिए चुनौती बन सकती है। बाढ़ का सबसे बड़ा असर उन बागानों पर पड़ने की आशंका है जो नदी के आसपास या निचले इलाकों में स्थित हैं। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने की स्थिति में पेड़ों की जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे पेड़ों के स्वास्थ्य और फल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, एक्सपोर्ट क्वालिटी के आम के लिए केवल उत्पादन ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि फल का आकार, रंग, पकने की स्थिति, गुणवत्ता और सुरक्षित तरीके से पैकेजिंग व परिवहन भी अहम होता है। बाढ़ के कारण यदि बागानों, संपर्क मार्गों या परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ता है तो आम को समय पर बाजार और संभावित निर्यात केंद्रों तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
किसान से लेकर कारोबारी तक चिंता:
जर्दालु आम का कारोबार केवल बागान मालिकों तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय व्यापारी, थोक विक्रेता, पैकिंग से जुड़े लोग, परिवहन कारोबारी और मजदूर भी जुड़े हैं। ऐसे में बाढ़ का असर पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
अगर बाढ़ के कारण आम की गुणवत्ता प्रभावित होती है या परिवहन बाधित होता है, तो एक्सपोर्ट क्वालिटी के फल की उपलब्धता कम हो सकती है। इसका सीधा असर कारोबारियों के ऑर्डर और किसानों को मिलने वाली कीमत पर पड़ने की आशंका है। वहीं, यदि बागानों को लंबे समय तक जलजमाव का सामना करना पड़ा तो आने वाले समय में पेड़ों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
GI टैग वाले उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बचाने की चुनौती:
भागलपुर का जर्दालु आम सिर्फ स्थानीय कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि बिहार की एक विशिष्ट पहचान है। जीआई टैग मिलने के बाद इसकी ब्रांडिंग और बाजार विस्तार की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण इसकी गुणवत्ता और आपूर्ति प्रभावित होना किसानों के साथ-साथ राज्य के लिए भी चिंता का विषय है।
किसानों और कारोबारियों की नजर अब गंगा के जलस्तर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और बागानों की स्थिति पर टिकी है। जरूरत इस बात की है कि प्रभावित बागान क्षेत्रों में जलनिकासी, परिवहन और किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में समय रहते कदम उठाए जाएं, ताकि जर्दालु आम की गुणवत्ता और बाजार तक उसकी पहुंच पर कम से कम असर पड़े।

















