


भागलपुर। गंगा और कोसी नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। नदी के बढ़ते जलस्तर और पानी के दबाव के बीच तटबंधों की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नवगछिया और जिला प्रशासन की टीमें संवेदनशील तटबंधों एवं कटाव संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही हैं। संभावित कटाव और पानी के दबाव से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई की जा रही है।

खरीक अंचल के राघोपुर पंचायत स्थित काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध एवं पुरानी रेलवे लाइन बांध की सुरक्षा पर विशेष नजर रखी जा रही है। अधिकारियों और तकनीकी टीमों द्वारा तटबंधों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जलस्तर में वृद्धि के कारण उत्पन्न दबाव को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
12 अंचलों की 114 पंचायतें बाढ़ प्रभावित

जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार भागलपुर जिले के 12 अंचलों की 114 पंचायत, 456 गांव और 899 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ की चपेट में आने से 2,10,219 परिवारों के 9,15,781 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन तथा राहत कार्यों के लिए 123 नाव संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा नारायणपुर अंचल के शहजादपुर पंचायत में लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बोट एंबुलेंस भी संचालित की जा रही है।
337 कम्युनिटी किचेन में लाखों लोगों को भोजन
बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 337 कम्युनिटी किचेन, सात बाढ़ राहत शिविर और 114 स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जा रहे हैं। कम्युनिटी किचेन के माध्यम से अब तक 37 लाख 8 हजार 315 बाढ़ पीड़ितों को भोजन कराया जा चुका है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ कम्युनिटी किचेन में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नगर निगम क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पहली बार चार कम्युनिटी किचेन संचालित किए जा रहे हैं। इन रसोईघरों के माध्यम से शहरी क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित परिवारों को नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
सात राहत शिविरों में 9 हजार से अधिक लोग रह रहे
शहरी क्षेत्र के सात राहत शिविरों में 2,092 परिवारों के 9,003 बाढ़ पीड़ितों के रहने की व्यवस्था की गई है। राहत शिविरों में प्रशासन की ओर से लोगों की जरूरत के अनुसार विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
शिविरों में चौकी, गद्दा, बेडशीट, मसनद और पंखे के साथ शौचालय, स्नानघर और पेयजल की व्यवस्था की गई है। बाढ़ पीड़ितों को दो समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों के लिए दूध और बिस्किट की व्यवस्था के साथ अस्थायी विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा राहत शिविरों में स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बच्चों के बीच अब तक 855 लीटर दूध और 3,733 पैकेट बिस्किट वितरित किए जा चुके हैं। पशुपालकों के लिए 944.43 क्विंटल पशुचारा उपलब्ध कराया गया है।
करीब 30 हजार परिवारों को मिली पॉलीथिन शीट
बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से 29,850 बाढ़ पीड़ित परिवारों को पॉलीथिन शीट उपलब्ध कराई गई है। इससे प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से रहने और अपने सामान को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है।
वहीं, बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। जिले में संचालित 114 स्वास्थ्य शिविरों में अब तक 41,826 लोगों का इलाज किया जा चुका है। चिकित्सकीय टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रखा गया है, ताकि बाढ़ के दौरान उत्पन्न होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का तत्काल उपचार किया जा सके।
राहत शिविरों में गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी
राहत शिविरों में रह रही गर्भवती महिलाओं की भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष निगरानी की जा रही है। अब तक 37 गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया है। इनमें से चार महिलाओं को प्रसव के लिए एंबुलेंस के माध्यम से सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका सुरक्षित प्रसव कराया गया।
इन चार महिलाओं में दो बच्चियों और दो बच्चों का जन्म हुआ है। जिला प्रशासन के अनुसार नवजात बच्चियों को 15-15 हजार रुपये तथा बच्चों को 10-10 हजार रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष से शीघ्र उपलब्ध कराए जाएंगे।
1.23 लाख परिवारों को मिलेगी सात-सात हजार रुपये की सहायता
बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन ने अब तक 1,23,352 बाढ़ पीड़ित परिवारों को जीआर राशि के रूप में सात-सात हजार रुपये की सहायता देने के लिए अनुशंसा की है।
ये वे परिवार हैं, जिनका नाम पहले से आपदा संपूर्ति पोर्टल पर दर्ज है तथा जिनका आधार सीडेड और पीएफएमएस से स्वीकृत है। प्रशासन के अनुसार इन परिवारों के बैंक खातों में 15 सितंबर को कुल 86 करोड़ 34 लाख 64 हजार रुपये हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर के बाद वैसे नए बाढ़ पीड़ित परिवार, जिनका नाम अभी आपदा संपूर्ति पोर्टल पर दर्ज नहीं है, उन्हें आपदा प्रबंधन विभाग से अनुमति प्राप्त कर पोर्टल पर जोड़ा जाएगा। इसके बाद पात्र परिवारों को भी सात हजार रुपये की जीआर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
तटबंधों पर प्रशासन की पैनी नजर
गंगा और कोसी के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील तटबंधों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। खासकर खरीक अंचल के काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध एवं पुरानी रेलवे लाइन बांध की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
















