


मिठास और लालिमा से देश-विदेश में बढ़ी मांग, किसानों ने उठाई GI टैग की मांग
नवगछिया । केले की खेती के लिए प्रसिद्ध नवगछिया-गोपालपुर क्षेत्र अब ‘मनराजी लीची’ के कारण भी नई पहचान बना रहा है। गंगा किनारे की उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगने वाली यह विशेष किस्म की लीची अपनी प्राकृतिक मिठास, चमकीले लाल रंग और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता के कारण बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार पिछले दो वर्षों में यहां की लीची दुबई और ओमान जैसे देशों तक भेजी गई है।

गोपालपुर प्रखंड के लतीपाकर धरहरा गांव के किसान एवं ट्रांसपोर्टर चंदन कुमार सिंह और मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि मनराजी लीची का छिलका अन्य लीचियों की तुलना में मोटा और खुरदुरा होता है, जिससे लंबी दूरी तक ढुलाई के दौरान फल सुरक्षित रहता है। यह लीची गुच्छों में लगती है और आकार में मध्यम से बड़ी होती है, जिसके कारण उत्पादन भी बेहतर होता है।
किसानों का कहना है कि स्वाद और गुणवत्ता के कारण इस लीची की मांग लगातार बढ़ रही है। चंदन कुमार सिंह ने बताया कि यदि ‘मनराजी लीची’ को जीआई (Geographical Indication) टैग मिल जाए तो इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक मजबूत होगी। इससे न सिर्फ किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि गोपालपुर क्षेत्र को भी नई पहचान प्राप्त होगी।

वहीं किसान मुकेश कुमार सिंह ने सरकार से बेहतर बाजार व्यवस्था और एयर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर बड़े बाजारों तक उत्पाद नहीं पहुंच पाने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। यदि परिवहन और विपणन की बेहतर व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसान और अधिक लाभ कमा सकते हैं।
फिलहाल बागानों में लीची पर लालिमा चढ़ने लगी है और किसान इस सीजन को लेकर काफी उत्साहित हैं। बगीचों में किसान दिन-रात मेहनत कर फलों की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने में जुटे हुए हैं। किसानों को उम्मीद है कि इस बार मनराजी लीची का कारोबार पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहेगा।
















