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कंधे पर विराजे कान्हा, भक्ति और आस्था के रंग में डूबा गोसाईंगांव

मंदिर परिसर से पूरे गांव तक निकली भव्य शोभायात्रा, ठाकुरबाड़ी से ग्राम देवताओं के दरबार तक पहुंची मेड़; गंगा घाट पर विधि-विधान से हुआ प्रतिमा विसर्जन

नवगछिया । गोपालपुर के
गोसाईंगांव स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण मंदिर में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव 2026 का समापन रविवार को श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ संपन्न हो गया । भगवान श्रीकृष्ण सहित मेड पर स्थापित माता देवकी, माता यशोदा, नंद बाबा, गणेश जी महराज की प्रतिमाओं को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद गंगा घाट ले जाकर विसर्जित किया गया। विसर्जन के दौरान पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। गांव की गलियों से होकर निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और श्रद्धालु शामिल हुए।

रविवार को प्रतिमाओं को विशेष रूप से तैयार की गई मेड़ पर विराजमान कराया गया। मेड़ पर श्रीकृष्ण लाल के साथ गणपति जी महाराज, नंद बाबा, देवकी माता और यशोदा माता की प्रतिमाएं स्थापित थीं। सैकड़ों युवाओं ने मेड़ को अपने कंधों पर उठाया और सबसे पहले मंदिर परिसर की परिक्रमा की। इसके बाद शोभायात्रा पूरे गोसाईंगांव में निकाली गई। रास्ते में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाते रहे। वातावरण में भक्ति गीत और जयघोष गूंजते रहे।

शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राधा कृष्ण ठाकुरबाड़ी पहुंची। वहां पूजा-अर्चना के बाद मेड़ को गांव के ग्राम देवता राय बाबा – कामा माई के दरबार में ले जाया गया। ग्रामीणों की मान्यता और परंपरा के अनुरूप विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धापूर्वक दर्शन-पूजन करने के बाद शोभायात्रा आगे बढ़ी।

इसके बाद श्रीकृष्ण सहित अन्य प्रतिमाओं को लेकर श्रद्धालु गोसाईंगांव के बड़ी गंगा घाट पहुंचे, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से गांव, परिवार और समाज की सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना की।

सुरक्षा व्यवस्था रही मुस्तैद

जन्माष्टमी महोत्सव के समापन और विसर्जन शोभायात्रा को लेकर गोपालपुर पुलिस भी पूरी तरह सतर्क रही। शोभायात्रा के मार्ग और गंगा घाट पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस पदाधिकारी और जवान पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रहे। किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो, इसके लिए भीड़ और शोभायात्रा की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी गई।

आयोजन के दौरान ड्रोन के माध्यम से भी वीडियो फुटेज तैयार किया गया, जिससे पूरे धार्मिक आयोजन और शोभायात्रा के दृश्य कैमरे में दर्ज किए गए। ड्रोन से क्षेत्र की निगरानी भी की गई।

सौ वर्ष से अधिक पुरानी है श्रीकृष्ण मंदिर की परंपरा

गोसाईंगांव का श्रीकृष्ण मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर की परंपरा सौ वर्ष से भी अधिक पुरानी है। प्रत्येक वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद अगले दिन तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है।

जन्माष्टमी के अवसर पर पूरे दिन मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में श्रीकृष्ण के साथ देवकी माता, यशोदा माता, वासुदेव और गणपति जी की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

भक्तों ने भगवान को बताशा, माखन, मिठाई और लड्डू सहित विभिन्न प्रकार के प्रसाद अर्पित किए। मंदिर की पुरानी परंपराओं में बताशा चढ़ाने की विशेष मान्यता भी बताई जाती है। ग्रामीणों के अनुसार मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण को लकड़ी या चांदी की बांसुरी भी अर्पित करते हैं।

मेले में उमड़ी भीड़, बच्चों में दिखा खास उत्साह

जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर के आसपास मेले का भी आयोजन हुआ। मेले में सौ से अधिक दुकानें लगीं, जहां खिलौने, मिठाइयां, प्रसाद, घरेलू सामान सहित विभिन्न वस्तुओं की दुकानें आकर्षण का केंद्र रहीं। बच्चों और महिलाओं की भीड़ विशेष रूप से देखने को मिली। देर शाम तक मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं से गुलजार रहा।

ग्रामीणों में दिखी परंपरा को लेकर विशेष आस्था

ग्रामीणों का कहना है कि गोसाईंगांव में जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव की पुरानी परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। हर वर्ष ग्रामीण मिल-जुलकर आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करते हैं। युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिलती है।

ग्रामीण भावानंद झा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दौरान पूरा गांव एक परिवार की तरह नजर आता है। बुजुर्गों के मार्गदर्शन में युवा जिस तरह जिम्मेदारी संभालते हैं, उससे पुरानी परंपरा आने वाली पीढ़ी तक पहुंच रही है।

वहीं, ग्रामीण गोरेलाल झा के अनुसार गोसाईंगांव के श्रीकृष्ण मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। जन्माष्टमी के अवसर पर दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं और विसर्जन के साथ अगले वर्ष फिर इसी उत्सव का इंतजार शुरू हो जाता है।

युवाओं ने भी आयोजन को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि मेड़ को कंधे पर लेकर गांव के विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुंचाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा और गांव के लोगों की सामूहिक भावना का प्रतीक है।

इस प्रकार पूजा-अर्चना, दर्शन, मेला, शोभायात्रा और प्रतिमा विसर्जन के साथ गोसाईंगांव में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव का भव्य समापन हुआ। पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी और धार्मिक उत्साह देखते ही बन रहा था।

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