


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। सरकारी राहत व्यवस्था शुरू होने के बावजूद शिविरों में रह रहे लोगों के सामने इलाज, पशुओं के चारे, शौचालय और बारिश से बचाव जैसी बुनियादी जरूरतें अब भी चुनौती बनी हुई हैं। रविवार को बिहार जनसंघर्ष समिति के संयोजक गौतम कुमार ने बाल निकेतन स्कूल और टिल्लाह कोठी पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और राहत एवं पुनर्वास व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान राहत शिविरों में सरकारी इंतजामों की एक मिली-जुली तस्वीर सामने आई।
बाल निकेतन स्कूल में बिजली, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था लगभग पूरी हो चुकी है। भोजन की व्यवस्था 7 सितंबर से शुरू होने की बात कही गई है। लेकिन सवाल यह है कि शिविर में रह रहे बाढ़ प्रभावित लोगों और उनके साथ आए मवेशियों के लिए स्वास्थ्य सुविधा कब शुरू होगी? अब तक यहां स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया है और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी नहीं हो सकी है।
उधर, टिल्लाह कोठी में राहत कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है। बाढ़ पीड़ितों की आवाजाही आसान बनाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने गेट का ताला खोल दिया है। भोजन, बिजली और पानी की व्यवस्था शुरू हो गई है, लेकिन शौचालय की सुविधा अभी बाकी है।
दोनों स्थानों पर एक समान समस्या ने राहत व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के लिए पन्नी या प्लास्टिक शीट तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। बारिश के बीच खुले या अस्थायी ठिकानों में रहने वाले परिवारों के लिए यह परेशानी और बढ़ा रही है।

समिति के संयोजक गौतम कुमार ने जिला प्रशासन की ओर से शुरू किए गए राहत कार्यों में तेजी के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही कहा कि राहत का मतलब केवल भोजन और पानी उपलब्ध कराना नहीं है। बाढ़ पीड़ितों को स्वास्थ्य सुविधा, पशुओं के लिए चारा, पर्याप्त शौचालय और बारिश से सुरक्षित अस्थायी आवास जैसी जरूरी सुविधाएं भी तत्काल मिलनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि 7 सितंबर को बिहार जनसंघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल बाढ़ पीड़ितों की अन्य समस्याओं और लंबित मांगों को प्रशासन के सामने रखकर उनके शीघ्र समाधान की मांग करेगा।
















