


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। ‘पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार’… हाथों में संदेश-पट्टिकाएं और चेहरों पर आत्मविश्वास। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर कहलगांव के मिर्धाचक आदिवासी टोले से बच्चों ने शिक्षा को लेकर ऐसी आवाज बुलंद की, जिसका संदेश स्कूल की दीवारों से निकलकर समाज तक पहुंचा।
प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में बच्चों ने अलग-अलग संदेशों के जरिए बताया कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति को अपने अधिकार समझने, सही निर्णय लेने और समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखाती है।
बच्चों की हाथों में मौजूद संदेश-पट्टिकाओं पर लिखा था – ‘हर व्यक्ति शिक्षित, हर परिवार साक्षर’ और ‘हर समाज सशक्त’। इन नारों के जरिए विद्यार्थियों ने लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने और साक्षरता को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
विद्यालय के प्रधान शिक्षक अर्जुन केशरी ने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर पहचानना या पढ़ना-लिखना सीखना नहीं है। शिक्षित व्यक्ति अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझता है। शिक्षा व्यक्ति को जागरूक बनाने के साथ आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने की ताकत देती है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। शिक्षक रंजीत कुमार समेत विद्यालय के सभी विद्यार्थी मौजूद रहे।
मिर्धाचक आदिवासी टोले के इस छोटे से विद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर दिया गया संदेश बड़ा था – जब बच्चों के हाथ में किताब और तख्ती आती है, तो सिर्फ एक बच्चा नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज के बदलने की उम्मीद जन्म लेती है।


















