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नवगछिया : भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के तत्वावधान में नमामि गंगे के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के अंतर्गत संचालित जलज परियोजना के तहत इस्माइलपुर प्रखंड की पूर्वी भिट्ठा पंचायत के छट्ठू सिंह टोला गांव में महिलाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ गंगा स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में महिलाओं को बताया गया कि जलज परियोजना से जुड़कर वे स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त कर सकती हैं। उन्हें आत्मनिर्भर बनने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

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जलज परियोजना के परियोजना सहयोगी राहुल कुमार राज ने बताया कि परियोजना के माध्यम से महिलाओं को प्राकृतिक धूपबत्ती, साबुन, हर्बल उत्पाद, हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री सहित विभिन्न पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं के कौशल का विकास कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उनके उत्पादों के विपणन और व्यवसाय विकास में भी हरसंभव सहयोग दिया जाता है। इसके लिए जलज परियोजना के अंतर्गत संचालित “जलज जागरूकता एवं बिक्री केंद्र” के माध्यम से उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री की व्यवस्था की जाती है। साथ ही जिला प्रशासन, विभिन्न सरकारी विभागों तथा अन्य संस्थाओं द्वारा आयोजित मेलों, प्रदर्शनियों, उत्सवों और जागरूकता कार्यक्रमों में स्वयं सहायता समूहों एवं प्रशिक्षित महिलाओं के स्टॉल भी लगाए जाते हैं, जिससे उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री, नए ग्राहकों से जुड़ने तथा स्थायी आजीविका विकसित करने का अवसर मिलता है।

राहुल कुमार राज ने कहा कि जलज परियोजना का उद्देश्य केवल गंगा नदी और जैव विविधता का संरक्षण करना ही नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा कि जब आजीविका और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, तभी सतत विकास के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने भी परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया और भविष्य में प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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