


शांति, भाईचारे और पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प
नवगछिया प्रखंड के जमुनियां गांव में 12वीं शरीफ का पर्व शांति, सौहार्द और भाईचारे के संदेश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव स्थित मदरसा अलैहे दादिया से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गांव के बड़े-बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक ने इसमें सहभागिता की।

जुलूस के दौरान लोगों ने पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन के माध्यम से लोगों को आपसी प्रेम, भाईचारे, शांति और सद्भाव का संदेश दिया गया। जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए लोगों को शांति और इंसानियत का संदेश देता रहा।
मदरसा अलैहे दादिया के प्राचार्य मौलाना कुतुबुद्दीन ने कहा कि 12वीं शरीफ का दिन मुस्लिम समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में तशरीफ लाए। उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम ने पूरी मानवता को प्रेम, दया, इंसाफ, भाईचारे और शांति का संदेश दिया।
मौलाना कुतुबुद्दीन ने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम के आने से पहले अरब समाज में बेटियों के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया जाता था। बेटियों को बोझ समझकर उनके जन्म पर उन्हें जिंदा दफन करने जैसी कुप्रथा प्रचलित थी। पैगम्बर-ए-इस्लाम ने इस कुप्रथा का विरोध किया और बेटियों को सम्मान एवं परिवार के लिए रहमत बताया। उन्होंने कहा कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाएं आज भी मानवता को प्रेम, समानता और सम्मान के साथ जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को केवल धार्मिक अवसरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनके संदेश को अपने आचरण और व्यवहार में भी उतारा जाए। लोगों को आपस में प्रेम और भाईचारा बनाए रखना चाहिए तथा समाज में शांति एवं सद्भाव कायम रखने के लिए मिल-जुलकर प्रयास करना चाहिए।

मौलाना कुतुबुद्दीन ने कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी का उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और उनके आदर्श जीवन से लोगों को परिचित कराना भी है। उन्होंने लोगों से उनके बताए रास्ते पर चलने और समाज में शांति, सद्भाव तथा इंसानियत का संदेश फैलाने का आह्वान किया।
जुलूस में मदरसा से जुड़े मौलाना नैय्यर जमाली, हाफिज रहमत, हाफिज अबुल कलाम, मो. सैफ रजा, मो. कैफ रजा, मो. शहादत खान सहित गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजन में गांव के बड़े-बुजुर्गों के साथ युवाओं और बच्चों की भी सहभागिता रही।
जुलूस के दौरान लोगों में उत्साह देखने को मिला। आयोजकों की ओर से लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से पर्व मनाने की अपील की गई। कार्यक्रम के माध्यम से समाज में शांति, प्रेम, सौहार्द और मानवता के संदेश को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
जमुनियां में आयोजित 12वीं शरीफ का यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के संदेश को समर्पित रहा। जुलूस-ए-मोहम्मदी में शामिल लोगों ने पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, शांति और इंसानियत की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
















