


नावों की कमी से बढ़ी परेशानी, बीच नदी में किराया वसूली के भी लगे आरोप
नवगछिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा गंगा पार आवागमन को निःशुल्क किए जाने की घोषणा के अगले ही दिन सोमवार को महादेवपुर गंगा घाट पर अव्यवस्था का माहौल देखने को मिला। नावों की कमी और परिचालन व्यवस्था में समन्वय के अभाव के कारण हजारों यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई, जिन्हें गंगा पार करने के लिए चार से पांच घंटे तक घाट पर रुकना पड़ा।
सुबह से ही महादेवपुर घाट पर यात्रियों और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद शुरुआती घंटों में व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई निजी नाव संचालक सरकार की नई व्यवस्था को लेकर असमंजस में रहे और कुछ नाव मालिक अपनी नावें लेकर घाट छोड़ गए, जिससे परिचालन प्रभावित हुआ।
स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन की पहल पर कुछ नावों एवं दो लांच जहाजों का संचालन शुरू कराया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यात्रियों को गंगा पार कराया गया। शाम तक स्थिति सामान्य हो सकी।
इस दौरान कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा निःशुल्क सेवा की घोषणा के बावजूद बीच नदी में उनसे किराया वसूला गया। खगड़िया निवासी रणवीर कुमार सिंह ने बताया कि नाव पर सवार यात्रियों से बीच धारा में पैसे मांगे गए और विरोध करने पर अभद्र व्यवहार भी किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो भी इन आरोपों को बल देते नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि रविवार को विक्रमशिला सेतु और बेली ब्रिज के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि सेतु पर यातायात बहाल होने तक गंगा पार करने वाले यात्रियों एवं निजी वाहनों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा तथा परिचालन का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
घटना के बाद भागलपुर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में नाव मालिकों एवं जलयान संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रति यात्री एवं दोपहिया वाहन पर निर्धारित राशि सरकार द्वारा नाव संचालकों को उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बिना निबंधित नावों के संचालन पर रोक, नावों के लिए नंबर सिस्टम लागू करने, अवैध वसूली करने वालों पर कार्रवाई तथा बरारी-महादेवपुर एवं जहान्वी चौक-बरारी घाट के बीच निःशुल्क जहाज सेवा संचालित करने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री की घोषणा और जमीनी स्तर पर सामने आई अव्यवस्था ने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आम लोगों की नजर प्रशासन द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक कदमों और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।













