
खबर का असर
@ प्रबंधन की 28 सितंबर की समयसीमा बीती, श्रम आयुक्त की बैठक भी रद्द; अब सवाल – क्या आंदोलन के दबाव में ही खुलेगा बकाया भुगतान का रास्ता।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। वादे पर वादा, तारीख पर तारीख और मजदूरों के बकाया भुगतान पर इंतजार! एनटीपीसी कहलगांव में एमजीआर (MGR) से जुड़े कामगारों के एरियर भुगतान का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक तरफ 500 से अधिक कामगारों की मांगों पर अब तक पूर्ण समाधान नहीं होने से दुर्गा पूजा के बाद आंदोलन और हड़ताल के आसार बने हुए हैं, तो दूसरी तरफ बकाया एरियर भुगतान को लेकर उठी आवाज के बाद गैंग संख्या-3 के करीब 40 मजदूरों को 15 अक्टूबर 2026 को भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है। मालूम हो कि हाल ही में इस खबर को ‘जी एस न्यूज’ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

इस आशय की जानकारी झारखंड मजदूर कल्याण संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक राजेश रंजन ने देते हुए आगे बताया कि इस घटनाक्रम ने बाकी मजदूरों की उम्मीदें तो बढ़ाई हैं, लेकिन सवाल भी खड़े कर दिए हैं। जब एक गैंग के मजदूरों को भुगतान किया जा सकता है, तो बाकी गैंगों के मजदूरों का बकाया कब चुकाया जाएगा? क्या अपने हक की राशि पाने के लिए मजदूरों को आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी। मजदूरों के भुगतान को लेकर खबर का असर सामने आने और बाकी एरियर भुगतान की तैयारी तेज होने के दावों के बीच अब प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित कार्यों में कुल सात गैंग हैं। प्रत्येक गैंग में कम से कम 40 मजदूर काम करते हैं। इस हिसाब से मजदूरों की कुल संख्या लगभग 280 से 300 के बीच बताई जा रही है।लेकिन बकाया एरियर भुगतान की तस्वीर यह है कि अब तक करीब 40 मजदूरों को ही राशि मिलने की जानकारी सामने आई है। यानी शेष मजदूरों को अपने बकाया भुगतान का इंतजार है। गैंग संख्या-3 के मजदूरों को 15 अक्टूबर को भुगतान किए जाने से यह उम्मीद जगी है कि अन्य गैंगों के मजदूरों का बकाया भी जल्द चुकाया जा सकता है। हालांकि, बाकी मजदूरों के भुगतान की तारीख और पूरी प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।
मालूम हो कि कहलगांव में एमजीआर से जुड़े कामगारों के वेतन और एरियर का विवाद नया नहीं है। झारखंड मजदूर कल्याण संघ के अनुसार, बढ़ी हुई दर से एरियर भुगतान के लिए प्रबंधन ने 28 सितंबर 2026 तक का समय लिया था। लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी सभी संबंधित कामगारों के भुगतान का मामला पूरी तरह नहीं सुलझा है। मामले के समाधान के लिए 13 अक्टूबर 2026 को सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष प्रस्तावित बैठक भी रद्द हो गई। इससे मजदूरों की समस्याओं के समाधान को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई।एक तरफ भुगतान की समयसीमा निकल गई, दूसरी तरफ श्रम आयुक्त के समक्ष होने वाली बैठक भी नहीं हो सकी। ऐसे में मजदूरों के बीच नाराजगी बढ़ने और आंदोलन तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
सिर्फ एरियर नहीं, इन मांगों पर भी फंसा है मामला।
संघ का कहना है कि इन मांगों का समाधान केवल आश्वासन देने से नहीं होगा। इसके लिए एकरारनामा की शर्तों को लागू करना और पात्र मजदूरों की बकाया राशि का भुगतान करना जरूरी है।झारखंड मजदूर कल्याण संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सह पूर्व विधायक राजेश रंजन कामगारों की मांगों को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। संघ की ओर से प्रबंधन के समक्ष बकाया भुगतान और अन्य लंबित मुद्दों के समाधान की मांग उठाई गई है।
















