


@ काजीकोरैया – राघोपुर मार्जिनल बांध के कटाव के बाद प्रशासन अलर्ट, पांच वार्डों में राहत व्यवस्था।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। काजीकोरैया – राघोपुर मार्जिनल बांध में कटाव और जलप्रवाह से पैदा हुई चिंता के बीच मंगलवार को राघोपुर के लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई। प्रभावित इलाके में जलस्तर घटने लगा है, जिससे हालात में सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि प्रशासन ने खतरे को देखते हुए निगरानी और राहत कार्यों में कोई ढिलाई नहीं बरती है।
कटाव से पैदा हुई स्थिति का असर वार्ड संख्या 05, 06, 07, 08 और 09 में है। इन इलाकों में प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। प्रभावित लोगों की जरूरतों के मुताबिक राहत और बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।

चार जगहों पर चल रही सामुदायिक रसोई:
पानी और कटाव से प्रभावित परिवारों के लिए प्रशासन ने भोजन की व्यवस्था को सबसे पहले संभाला है। इसके लिए चार स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है।
राजकीय मध्य विद्यालय, राघोपुर
काली स्थान, राघोपुर
दुर्गा स्थान, राघोपुर, वार्ड संख्या-09
सामुदायिक भवन, वार्ड संख्या-06
इन सामुदायिक रसोइयों के जरिए प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, ताकि जलजमाव और आवागमन की परेशानी के बीच किसी परिवार के सामने भोजन का संकट न खड़ा हो।
जलस्तर घटा, मगर निगरानी जारी:
प्रशासन के अनुसार जलस्तर में कमी आने से फिलहाल स्थिति में सुधार हुआ है। इसके बावजूद बांध के कटाव और जलप्रवाह को देखते हुए प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और जरूरतमंद लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन का फोकस अब दो मोर्चों पर है – पानी की स्थिति पर नजर और प्रभावित परिवारों तक राहत। हालात बिगड़ने की स्थिति में आवश्यकता के अनुरूप तत्काल कार्रवाई करने की तैयारी भी रखी गई है।
अफवाह से बचने की अपील:
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित लोगों की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्थिति के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल घटता जलस्तर राघोपुर के लिए राहत का संकेत जरूर है, लेकिन बांध के कटाव ने खतरे की जो तस्वीर दिखाई है, उसके बीच प्रशासन और ग्रामीणों की नजर अब पानी के अगले रुख पर टिकी है।
















