


नवगछिया।
नवगछिया घाट ठाकुरवाड़ी में आयोजित 51वां श्री रामचरितमानस नवाह पारायण एवं श्रीराम कथा के अमृत वर्षा कार्यक्रम का समापन गुरुवार को भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा पंडाल रामभक्तों से खचाखच भरा रहा।
प्रयागराज से पधारे कथावाचक स्वामी विनोदानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा, “राजा की नजर में पुत्र और प्रजा दोनों समान होते हैं।” उन्होंने जीवन में संयम और आत्मनियंत्रण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि काम (विकार) से कोई बच नहीं सकता, इसलिए व्यक्ति को स्वयं को संभालना चाहिए।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन का भी विशेष आयोजन हुआ। “हम तुम्हारे हैं प्रभु जी, हम तुम्हारे हैं…” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
स्वामी विनोदानंद सरस्वती ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 50 वर्षों से इस प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी नवगछियावासियों पर भगवान राम की विशेष कृपा बनी रहे।
इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के शिव जयसवाल, बनवारी पंसारी, मीडिया प्रभारी अशोक केडिया, अरुण यादुका, संतोष भगत, संतोष यादव, अनिल भगत, विशाल चिरानिया, नरसिंह चिरानिया, किशन याहुका, प्रवीण भगत, अजय भगत, विनीत खेमका, कंचन खेमका, आनंद केडिया, पप्पू केडिया, शंकर चिरानिया, श्रवण केडिया, कन्हैया केडिया, आयुष खेमका, कैलाश अग्रवाल, अनिल चिरानिया सहित समिति के सभी सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
समापन के साथ ही आयोजन ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आध्यात्मिकता की गहरी छाप छोड़ दी।













