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11वीं-12वीं के छात्रों से मोटी फीस वसूली का आरोप, शिकायत की तैयारी; बोले अभिभावक- ‘फीस नहीं देने पर कोचिंग से निकाल देते हैं’

नवगछिया। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने वाले कुछ शिक्षकों पर अब निजी कोचिंग के नाम पर मोटी कमाई करने के गंभीर आरोप लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग के स्पष्ट नियमों के बावजूद नवगछिया में वर्षों से सरकारी शिक्षक अपने निजी आवासों पर 11वीं एवं 12वीं के छात्रों की कोचिंग चला रहे हैं और छात्रों से हजारों रुपये की फीस वसूली जा रही है। मामला अब तूल पकड़ने लगा है। नाराज अभिभावकों ने बैठक कर पूरे प्रकरण की शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन से करने का निर्णय लिया है।

नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर कई अभिभावकों ने बताया कि नवगछिया व आसपास के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक नियमित रूप से अपने घरों पर कोचिंग का संचालन कर रहे हैं। आरोप है कि इनमें अधिकांश विज्ञान – कला संकाय के शिक्षक हैं, जो 11वीं और 12वीं के छात्रों को पढ़ाने के नाम पर प्रत्येक छात्र से मोटी फीस वसूलते हैं। अभिभावकों का दावा है कि इन कोचिंग केंद्रों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन कर रहे हैं और हर महीने लाखों रुपये की फीस की वसूली हो रही है।

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षकों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम कहते हैं कि “सब कुछ मैनेज है, कोई कुछ नहीं कर सकता।” उनका कहना है कि यदि कोई छात्र समय पर फीस जमा नहीं करता, तो उसे अधिक समय नहीं दिया जाता। एक सप्ताह के भीतर फीस नहीं देने पर कोचिंग से बाहर कर दिया जाता है। इससे गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

अभिभावकों के अनुसार गौशाला रोड, हॉस्पिटल रोड, लाल बिहारी कॉलोनी सहित नवगछिया शहर के कई इलाकों में सरकारी शिक्षकों के आवास ही कथित रूप से कोचिंग संस्थान बने हुए हैं। यहां प्रतिदिन नियमित कक्षाएं संचालित होती हैं। उनका आरोप है कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी कोचिंग का संचालन शिक्षा विभाग के नियमों का खुला उल्लंघन है, लेकिन वर्षों से यह व्यवस्था बिना किसी रोक-टोक के चल रही है।

बैठक में मौजूद अभिभावकों ने कहा कि अब वे इस मामले को दबने नहीं देंगे। जल्द ही सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन के साथ पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों से की जाएगी। साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

हालांकि, जिन शिक्षकों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।

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