


डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने बेलपत्र के धार्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व की दी जानकारी
पूर्णिया। श्रावण मास के अवसर पर सहयोग संस्था के अध्यक्ष डॉ. अजीत प्रसाद सिंह एवं वॉलिंटियर सदस्यों ने बेलपत्र के पौधे लगाए और लोगों के बीच पौधों का वितरण किया। इस अवसर पर डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने श्रावण मास में बेलपत्र का पौधा लगाने के धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में घर या किसी पवित्र स्थान पर बेलपत्र का पौधा लगाना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ, कल्याणकारी और पुण्यदायी माना जाता है।

डॉ. अजीत प्रसाद सिंह ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र के वृक्ष को भगवान शिव के स्वरूप से जोड़ा गया है। सावन के महीने में बेलपत्र का पौधा लगाने और उसकी सेवा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। नियमित रूप से बेल के पौधे की सेवा करने और जल अर्पित करने से पितृ दोष का प्रभाव कम होने तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की धार्मिक मान्यता है। उन्होंने बताया कि सावन में बेल वृक्ष के मूल भाग में जल अर्पित करना भी पुण्यदायी माना जाता है।
उन्होंने कहा कि बेलपत्र का पौधा लगाने का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं तथा धूल, धुआं और हानिकारक गैसों को कम करने में मदद करते हैं। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधे रखती हैं, जिससे बारिश और बाढ़ के दौरान मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायता मिलती है। पेड़ जलचक्र को संतुलित रखने, तापमान नियंत्रित करने तथा पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की। पौधारोपण के संबंध में उन्होंने बताया कि धार्मिक एवं वास्तु मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र का पौधा घर की उत्तर-पश्चिम दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। पौधे को स्वच्छ मिट्टी में गमले अथवा जमीन में लगाया जा सकता है। पौधा लगाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने की भी धार्मिक मान्यता है।
इस अवसर पर डॉ. केके चौधरी, शंकर प्रसाद, कुमार राजा, कुमार मनीष, शिक्षक केदार सिंह, गोलू सिंह और अमृता कुमारी सहित अन्य सदस्यों का सहयोग सराहनीय रहा।
















