


@ खतरे से बेखौफ दर्जनभर बच्चे कर रहे अठखेलियां, हादसे की आशंका; समय रहते रोकथाम जरूरी
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के नीचे गंगा की तेज धार में दर्जनभर बच्चों के बेखौफ तैरने की तस्वीर सामने आई है। तस्वीर में बच्चे गंगा की धारा के बीच पानी में तैरते और अठखेलियां करते नजर आ रहे हैं। जिस स्थान पर बच्चे तैर रहे हैं, वहां गंगा का बहाव तेज है और पानी के अंदर बने भंवर तथा अचानक बदलती धारा उनके लिए कभी भी जानलेवा साबित हो सकती है। पिछले दिनों बाढ़ के पानी में ऊंची इमारत, पुल-पुलिया से बच्चों के खतरनाक कूद की तस्वीर सामने आ चुकी है।
कई बार उत्साह और मस्ती के दौरान बच्चे नदी की गहराई और धारा की ताकत का अंदाजा नहीं लगा पाते। बाढ़ के समय विक्रमशिला सेतु के नीचे का इलाका विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है, जहां नदी की धारा कई जगहों पर तेज रहती है। ऐसे में बच्चों का बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के नदी में उतरना गंभीर चिंता का विषय है।

फिलहाल गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे आ रहा है, लेकिन नदी के बहाव में अभी पूरी तरह स्थिरता नहीं आई है। जलस्तर कम होने के बावजूद नदी की तेज धारा, करेंट और घिरनी यानी भंवर का खतरा बना हुआ है। पानी के ऊपर से नदी अपेक्षाकृत सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन सतह के नीचे धारा की दिशा और गति अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में तैराकी में माहिर नहीं होने वाले बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
नदी में हादसे अक्सर अचानक होते हैं। अचानक गहरे पानी में चले जाने या भंवर में फंसने के बाद संभलने का मौका बहुत कम मिलता है। खासकर बच्चों के लिए ऐसी स्थिति और भी जोखिम भरी है। यदि कोई बच्चा करेंट की चपेट में आ जाता है तो उसे बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
तस्वीर में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों का नदी की तेज धार में उतरना यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर वहां बच्चों की निगरानी कौन कर रहा है। यदि समय रहते इन्हें नदी में जाने से नहीं रोका गया तो किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासनिक सक्रियता दिखाने का कोई फायदा नहीं होगा।
प्रशासन और अभिभावकों से निगरानी की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पुलिस-प्रशासन से मांग की है कि विक्रमशिला सेतु के नीचे गंगा किनारे संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए। नदी के खतरनाक हिस्सों में चेतावनी बोर्ड लगाए जाने के साथ बच्चों को नदी में उतरने से रोकने के लिए नियमित गश्त भी जरूरी है।
पानी उतरने के बावजूद बहाव पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है, इसलिए फिलहाल गंगा में बच्चों का इस तरह उतरना किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। समय रहते बच्चों की इस खतरनाक हरकत पर लगाम लगाना जरूरी है, ताकि मनोरंजन और लापरवाही किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द न बन जाए।

















