


@ विक्रमशिला सेतु के मरम्मत कार्य को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता के बीच बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने बड़ा भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि सेतु पर काम जरूरी है, लेकिन इसके कारण आम लोगों की आवाजाही ठप नहीं होने दी जाएगी। सरकार और जिला प्रशासन मिलकर वैकल्पिक आवागमन की पुख्ता व्यवस्था करेंगे।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। विक्रमशिला सेतु से सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। 28 अगस्त की आधी रात के बाद यह महत्वपूर्ण पुल करीब तीन महीने के लिए बंद हो सकता है। वजह है – पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का बड़ा पुनर्निर्माण। इस दौरान मौजूदा अस्थायी बेली ब्रिज को हटाकर उसकी जगह स्टील ब्रिज और नया सुपर स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। बहरहाल, पुल बंद करने और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन की अंतिम घोषणा को ही आधिकारिक माना जाना चाहिए।

वहीं विक्रमशिला सेतु बंद हुआ तो जनता नहीं होगी बे-सहारा, ऊर्जा मंत्री ने वैकल्पिक व्यवस्था का भरोसा दिया है। विक्रमशिला सेतु के मरम्मत कार्य को लेकर लोगों की बढ़ती चिंता के बीच बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने बड़ा भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि सेतु पर काम जरूरी है, लेकिन इसके कारण आम लोगों की आवाजाही ठप नहीं होने दी जाएगी। सरकार और जिला प्रशासन मिलकर वैकल्पिक आवागमन की पुख्ता व्यवस्था करेंगे। पुल बंद होने से पैदा होने वाली स्थिति पर सवाल पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।उन्होंने कहा कि बाढ़ का मौसम है और प्रशासन अलर्ट है। पर्व-त्योहार आते-जाते रहेंगे, लेकिन सेतु की सुरक्षा और उसका पुनर्निर्माण भी उतना ही जरूरी है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
वैकल्पिक रास्ते के तौर पर गंगा में पीपा पुल बनाए जाने की चर्चा पर मंत्री ने स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि सावन-भादो और बाढ़ के मौसम में गंगा का जलप्रवाह तेज रहता है। ऐसे समय पीपा पुल को हटा लिया जाता है, इसलिए अभी इसका निर्माण तकनीकी रूप से संभव नहीं है।यानी सेतु की मरम्मत के दौरान विकल्प तो तैयार किया जाएगा, लेकिन गंगा के बीच पीपा पुल फिलहाल उस विकल्प का हिस्सा नहीं होगा।
विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और आगे पूर्वी बिहार व सीमांचल से जोड़ने वाला अहम मार्ग है। ऐसे में पुल पर आवागमन बंद होने की स्थिति में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों और मालवाहक वाहनों के लिए सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक रास्ता तैयार करने की होगी।
पुल निर्माण निगम की योजना के मुताबिक, सेतु के चार सुपर स्ट्रक्चर बदले जाएंगे। इसके अलावा एक्सपेंशन ज्वाइंट और बेयरिंग का काम भी होगा। निर्माण पूरा करने के बाद 30 नवंबर तक पुल को दोबारा यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। पूरी परियोजना पर करीब 99 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई है।
विक्रमशिला सेतु के बंद रहने के दौरान गंगा पर पांटून पुल बनाने का विकल्प फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। हाईलेवल फ्लड की आशंका के कारण पांटून पुल को सुरक्षित और स्थायी विकल्प नहीं माना जा रहा है। ऐसे में पुल बंद होने के बाद वैकल्पिक आवागमन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के सामने होगी। यात्रियों के लिए नाव सेवा जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
विक्रमशिला सेतु महज भागलपुर का पुल नहीं, बल्कि नवगछिया, सीमांचल और पूर्वी बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसके बंद होने से रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले यात्रियों, बसों, ट्रकों और दूसरे वाहनों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ सकता है। यानी 28 अगस्त की रात से शुरू होने वाला यह ‘मेगा ब्लॉक’ सिर्फ पुल पर काम नहीं, बल्कि पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था की बड़ी परीक्षा बनने वाला है।
















