


बिहार पुलिस के सिपाही धनंजय पासवान के नाम से क्यूआर कोड के जरिए आर्थिक सहयोग मांगने का दावा, विभागीय अनुमति और राशि के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग

नवगछिया : बाढ़ की विभीषिका के बीच नवगछिया पुलिस में तैनात बिहार पुलिस के एक सिपाही धनंजय पासवान के नाम से सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्ट में बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने की बात कहते हुए आम लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील किए जाने और इसके लिए क्यूआर कोड उपलब्ध कराए जाने का दावा किया जा रहा है। पोस्ट इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली के साथ-साथ राहत कार्यों में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी ने व्यक्तिगत स्तर पर बाढ़ राहत के नाम पर क्यूआर कोड जारी कर आर्थिक सहयोग मांगा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसके लिए विभाग या सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही, यदि राशि एकत्र की गई है तो उसके संग्रह और खर्च का पूरा विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
प्रशासन चला रहा राहत एवं बचाव कार्य

इधर, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में कम्युनिटी किचन समेत आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। वरीय अधिकारियों द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
ऐसे में निजी स्तर पर राहत के नाम पर आर्थिक सहयोग जुटाए जाने की बात सामने आने से राहत कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और उसमें किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया सक्रियता भी चर्चा में
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुछ पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया गतिविधियां भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बाढ़ के पानी के बीच जाकर वीडियो और रील बनाए जाने को लेकर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों की मदद करना सराहनीय पहल है, लेकिन राहत कार्य से जुड़ी किसी भी आर्थिक गतिविधि में पारदर्शिता और विभागीय नियमों का पालन बेहद जरूरी है। विशेषकर जब कोई सरकारी कर्मचारी राहत के नाम पर आम लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील करता है, तो उसके लिए अनुमति, राशि के स्रोत और खर्च का स्पष्ट विवरण होना आवश्यक है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
अब पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। यदि सिपाही के नाम से वास्तव में व्यक्तिगत क्यूआर कोड के माध्यम से राहत के लिए राशि मांगी गई है, तो यह जांच का विषय होगा कि राशि किस खाते में जा रही थी, किस अनुमति के तहत राशि एकत्र की जा रही थी और एकत्र राशि का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया।
मामले को लेकर नवगछिया एसपी वैभव शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। पुलिस अथवा प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।















