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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर । धार्मिक आयोजनों को आस्था, शांति और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है, लेकिन घोघा थाना क्षेत्र में आयोजित शिव शक्ति यज्ञ का समापन हिंसा, अफरातफरी और विवाद के साये में हुआ। यज्ञ के अंतिम दिन देर रात ऐसा बवाल मचा कि पूरा परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। चाकू, लोहे की रॉड और खंती से हुए हमलों में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हो गया, जब यज्ञ का संचालन कर रहे पीरपैंती थाना क्षेत्र के दुबौली निवासी बाबा बाल योगी त्यागी जी महाराज (इंटरनेशनल भिखारी) कलश और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन कराए बिना ही अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर मौके से फरार हो गए।
घटना घोघा थाना क्षेत्र के जानीडीह, शाहपुर और कुलकुलिया गांवों के बीच चल रहे शिव शक्ति यज्ञ में सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी बात को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते दो गुटों के बीच हिंसक संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर चाकू, लोहे की सरिया और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। कुछ देर के लिए पूरा यज्ञ परिसर चीख-पुकार और भगदड़ का केंद्र बन गया।
इस हिंसक झड़प में शाहपुर गांव निवासी अशोक मंडल के 20 वर्षीय पुत्र छोटू कुमार को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। वहीं कुलकुलिया गांव निवासी पप्पू मंडल के पुत्र पर लोहे की सरिया और खंती से जानलेवा हमला किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों युवकों के साथ हुई मारपीट मॉब लिंचिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। फिलहाल दोनों घायल अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वे घटना के संबंध में कोई बयान दे सकें।
घटना के बाद यज्ञ समिति और ग्रामीणों में उस समय और अधिक नाराजगी फैल गई, जब यज्ञ करा रहे बाबा बाल योगी त्यागी जी महाराज बिना किसी सूचना के आयोजन स्थल छोड़कर चले गए। आरोप है कि न तो उन्होंने पुलिस को समय पर घटना की जानकारी दी और न ही धार्मिक परंपरा के अनुसार कलश एवं प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की। आखिरकार स्थानीय ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर कलश और प्रतिमाओं को ट्रैक्टर पर लादा तथा गंगा घाट पहुंचकर उनका विसर्जन कराया।

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ग्रामीणों का आरोप है कि यदि घटना की सूचना समय रहते पुलिस को दी जाती तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। लोगों का कहना है कि आयोजक की जिम्मेदारी केवल धार्मिक अनुष्ठान कराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि आयोजन स्थल की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इधर घोघा थाना अध्यक्ष आशुतोष कुमार ने बताया कि घटना पुलिस के संज्ञान में है। अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल कर रही है तथा आवेदन मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिस यज्ञ का उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करना था, उसका समापन खून-खराबे और विवाद के साथ होना कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि धार्मिक आयोजनों के जिम्मेदार लोग ही संकट की घड़ी में आयोजन स्थल छोड़कर चले जाएं, तो आस्था की रक्षा कौन करेगा? अब लोगों की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि हिंसा के दोषियों के साथ-साथ आयोजन की जिम्मेदारियों की भी निष्पक्ष पड़ताल होती है या नहीं।

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