


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। करीब 17 साल पुराने आचार संहिता उल्लंघन के मामले ने एक बार फिर झारखंड सरकार के उद्योग मंत्री और गोड्डा विधायक संजय यादव को अदालत की चौखट तक पहुंचा दिया। मंगलवार को वह भागलपुर एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए। भौतिक उपस्थिति दर्ज कराने के बाद मंत्री ने मामले को लेकर अपनी सफाई दी और उन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की, जिनमें उनके खिलाफ नए वारंट की बात कही जा रही थी।
संजय यादव ने साफ कहा कि उनके खिलाफ कोई नया वारंट जारी नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, अदालत ने उन गवाहों के खिलाफ वारंट जारी किया है, जो लगातार सुनवाई से अनुपस्थित रहे हैं।
‘धार्मिक आयोजन को चुनावी कार्यक्रम बना दिया गया’:
मंत्री ने 2009 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उनके ढाका मोड़ स्थित आवासीय परिसर में पारंपरिक चैती दुर्गा पूजा का आयोजन हुआ था। इसी दौरान चुनाव की घोषणा के चलते आदर्श आचार संहिता लागू थी। पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने को आधार बनाकर उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया।
संजय यादव ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि जिस आयोजन को उनके परिवार की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा के तौर पर देखा जाना चाहिए था, उसे राजनीतिक और चुनावी गतिविधि का रंग दे दिया गया। उनका आरोप है कि विरोधियों ने उनकी छवि प्रभावित करने के उद्देश्य से इस मामले को तूल दिया।
17 साल पुराना मामला, अब स्पीड ट्रायल:
मंत्री ने कहा कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और वह न्यायपालिका का सम्मान करते हुए कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की सुनवाई स्पीड ट्रायल के तहत चल रही है।
यानी, एक तरफ 2009 की वह पूजा है, जिसने चुनावी आचार संहिता के बीच कानूनी विवाद का रूप लिया और दूसरी तरफ 2026 में उसी मामले की अदालत में चल रही सुनवाई – जिसमें अब गवाहों की गैरहाजिरी भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गई है।
मंत्री का संदेश स्पष्ट है – मामला पुराना है, लेकिन उनके खिलाफ नया वारंट नहीं। अब इस पुराने विवाद का फैसला अदालत की प्रक्रिया से ही होना है।

















