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भागलपुर। शहर में रसोई गैस की किल्लत अब आम घरों से निकलकर बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंच गई है। गैस आपूर्ति बाधित होने का सबसे अधिक असर होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई दुकानों पर देखने को मिल रहा है। आधुनिक किचन से लैस कई प्रतिष्ठान अब मजबूरी में पुराने दौर की तरह कोयले के चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार गैस सिलेंडर की लगातार कमी के कारण होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों को भोजन और मिठाई तैयार करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानों में कोयले की धीमी आंच और धुएं के बीच काम करना कर्मचारियों की मजबूरी बन गई है।

व्यवसायियों का कहना है कि गैस उपलब्ध नहीं होने से उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। पहले जहां बड़ी मात्रा में मिठाइयाँ और खाद्य सामग्री तैयार होती थी, वहीं अब सीमित उत्पादन करना पड़ रहा है। इससे ग्राहकों की मांग पूरी करना भी चुनौती बनता जा रहा है।

रेस्टोरेंट कर्मचारियों ने बताया कि गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण काम का समय बढ़ गया है और लागत भी अधिक हो रही है। धुएं वाले चूल्हों पर काम करना स्वास्थ्य के लिए भी परेशानी पैदा कर रहा है।

व्यापारियों ने प्रशासन और गैस एजेंसियों से जल्द आपूर्ति सामान्य कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो कारोबार पर आर्थिक असर और गहरा सकता है तथा ग्राहकों को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी।

गौरतलब है कि भागलपुर शहर में गैस संकट का असर अब खाद्य व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ने लगा है। व्यवसायियों को उम्मीद है कि शीघ्र आपूर्ति बहाल होने से स्थिति सामान्य हो सकेगी।

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