


नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में गुरुवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई, जहां एक महिला मरीज को सामान्य कमजोरी और शरीर दर्द की शिकायत पर कुत्ते के काटने में दिया जाने वाला एंटी-रेबीज वैक्सीन लिख दिया गया। मामले की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में हंगामा खड़ा हो गया और पीड़ित महिला ने विरोध में धरना दे दिया।
जानकारी के अनुसार, नवगछिया थाना क्षेत्र के नगरह जोनिया टोला निवासी किरण देवी (पति–विष्णुदेव मंडल) गुरुवार को शरीर में कमजोरी और दर्द की शिकायत लेकर अनुमंडल अस्पताल पहुंचीं। पंजीकरण कराने के बाद वह ओपीडी में इलाज के लिए गईं, जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन लिख दिया।
पर्ची लेकर जब महिला दवा काउंटर पर पहुंचीं, तो वहां से उन्हें इंजेक्शन लेने के लिए भेजा गया। इसके बाद जब वह इमरजेंसी वार्ड में पहुंचीं, तो वहां भी स्टाफ ने ‘एंटी-रेबीज’ इंजेक्शन लेने को कहा। यह सुनते ही महिला भड़क उठीं और उन्होंने सवाल किया कि जब उन्हें किसी कुत्ते ने नहीं काटा है, तो यह दवा क्यों दी जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजन उन्हें वापस डॉक्टर के पास ले गए। आरोप है कि चिकित्सक ने अपनी गलती स्वीकारने के बजाय पर्ची में संशोधन कर दिया और उदासीनता भरे लहजे में कहा कि “नहीं लेना है तो मत लीजिए।” इस रवैये से आक्रोशित महिला अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गईं और लगभग दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन करती रहीं।
पीड़िता का कहना था कि यदि वह बिना जानकारी के इंजेक्शन लगवा लेतीं, तो उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता था। उन्होंने इसे अपनी जान के साथ खिलवाड़ बताते हुए दोषी चिकित्सक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही मामले की शिकायत थाना में करने की बात भी कही।
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार मौके पर पहुंचे और महिला को समझाकर मामला शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान रोगी कल्याण समिति के सदस्य राजेंद्र यादव भी पहुंचे और अस्पताल प्रशासन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अस्पताल में लगातार इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
करीब एक घंटे तक अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। महिला लगातार दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ी रहीं। इस संबंध में उपाधीक्षक डॉ. पिंकेश कुमार ने बताया कि चिकित्सक से लापरवाही हुई है। जांच में पर्ची पर दवा का उल्लेख त्रुटिवश पाया गया है। संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
















