


जानकारी के अनुसार, कंपनी के एजेंटों ने ग्रामीण क्षेत्रों में घूम-घूमकर लोगों को कम ब्याज दर पर 1 लाख 60 हजार रुपये तक का आसान ऋण उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया। ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करने और खाता खोलने के नाम पर प्रत्येक व्यक्ति से 5 हजार रुपये जमा कराए गए। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि अगले दिन उनके बैंक खाते में ऋण की राशि भेज दी जाएगी।

लोन मिलने की उम्मीद में सैकड़ों लोगों ने अपनी जमा पूंजी कंपनी के पास जमा कर दी। लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी किसी के खाते में ऋण राशि नहीं पहुंची। इसके बाद जब लोगों ने कंपनी के अधिकारियों और एजेंटों से संपर्क करने का प्रयास किया तो उनके मोबाइल फोन बंद मिले।
संदेह होने पर पीड़ित शुक्रवार को कंपनी के कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यालय पर ताला लटका मिला। कार्यालय बंद मिलने के बाद लोगों को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद दर्जनों महिलाओं सहित बड़ी संख्या में पीड़ित सदर थाना पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई।

पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने सुनियोजित तरीके से लोगों को झांसे में लेकर लाखों रुपये की वसूली की और फिर कार्यालय बंद कर फरार हो गई। अधिकांश पीड़ित ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े हैं, जिन्होंने ऋण की उम्मीद में पैसे जमा किए थे।
मामले में भवन मालिक माहिर अख्तर ने बताया कि बेगूसराय निवासी राहुल कुमार ने 31 मई को कार्यालय खोलने के लिए भवन किराए पर लिया था। बातचीत के दौरान 22 हजार रुपये मासिक किराया और एक लाख रुपये एडवांस देने की बात हुई थी। हालांकि कार्यालय संचालकों ने एडवांस राशि का भुगतान नहीं किया था। इसके बावजूद उन्होंने कार्यालय शुरू कर दिया और कुछ ही दिनों में लोगों से पैसे जमा कराना शुरू कर दिया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पीड़ितों ने प्रशासन से ठगी की राशि वापस दिलाने तथा आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की फर्जी वित्तीय कंपनियों पर समय रहते निगरानी नहीं होने के कारण आम लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं।
फिलहाल पुलिस कंपनी संचालकों और एजेंटों की तलाश में जुटी हुई है तथा पूरे मामले की जांच की जा रही है।















