


बिहपुर सत्याग्रह के अग्रणी सेनानी का 61वां परिनिर्वाण दिवस मनाया गया
भागलपुर । बिहपुर प्रखंड के औलियाबाद में स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह का 61वां परिनिर्वाण दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह संघर्ष मंच के संयोजक सुजीत कुमार सुमन के नेतृत्व में किया गया।
वीरो सिंह के पुत्र हरेराम सिंह ने बताया कि 9 जून 1965 को बिहपुर सत्याग्रह की 35वीं वर्षगांठ पर स्वराज आश्रम में दिए गए अपने अंतिम ओजस्वी संबोधन के बाद उन्होंने वहीं अंतिम सांस ली थी। आजादी के बाद भी उनका अधिकांश समय स्वराज आश्रम में ही बीता और उनकी इच्छा थी कि अंतिम समय इसी ऐतिहासिक स्थल पर बीते।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन में वीरो सिंह के योगदान को याद किया। मध्य विद्यालय पछियारी टोला के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार दीपक ने बताया कि 9 जून 1930 को बिहपुर सत्याग्रह के दौरान भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद भी शामिल हुए थे। अंग्रेजी हुकूमत द्वारा लाठीचार्ज किए जाने पर वीरो सिंह ने साहस का परिचय देते हुए राजेंद्र बाबू को गंभीर चोटों से बचाया था।
पूर्व जिलाध्यक्ष राजनीति सिंह ने बताया कि वीरो सिंह के निधन पर पूरे बिहार के स्वतंत्रता सेनानी एकत्र हुए थे और तिरंगा यात्रा के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई थी। वहीं समाजसेवी शिवनंदन सिंह एवं जदयू नेता पप्पू सिंह निषाद ने उन्हें देश का सच्चा नायक बताते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।
वक्ताओं ने कहा कि बिहपुर सत्याग्रह के 96 वर्ष पूरे होने के बावजूद कई स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान आज भी उपेक्षित है। उन्होंने वीरो सिंह के जीवन और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
















