


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। ऐसे समय में जब इलाज का खर्च आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है, बिहार के भागलपुर में एक डॉक्टर अपनी सेवा और संवेदनशीलता से अलग पहचान बना रहे हैं। डॉ. पी. राम केडिया के लिए चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम है। यही कारण है कि उनके क्लीनिक से कोई गरीब मरीज केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर दवा और घर लौटने का किराया लेकर भी जाता है।
डॉ. केडिया के यहां हर दिन कोसी और सीमांचल समेत बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों से वे फीस नहीं लेते। कई बार मरीजों के पास दवा खरीदने के पैसे नहीं होते, तो वे अपनी जेब से दवाइयां दिलाते हैं। यदि किसी के पास घर लौटने का किराया भी नहीं होता, तो उसका इंतजाम भी खुद करते हैं।
कोरोना महामारी के दौरान जब कई निजी क्लीनिक बंद थे और संक्रमित मरीजों के इलाज को लेकर भय का माहौल था, तब डॉ. केडिया ने अपनी क्लीनिक खुली रखी। उन्होंने जोखिम उठाकर मरीजों का उपचार किया और जरूरतमंदों की लगातार सेवा की। यही वजह है कि कई मरीज आज भी उन्हें अपने जीवन का रक्षक मानते हैं।

मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज में प्राध्यापक रह चुके डॉ. केडिया ने 28 जनवरी 2020 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर पूरी तरह जनसेवा का रास्ता चुना। इससे पहले पूर्णिया के अमौर रेफरल अस्पताल में कार्यरत रहने के दौरान भी उन्होंने फीस का अनोखा तरीका अपनाया था। क्लीनिक में एक दान-पात्र रखा रहता था, जिसमें मरीज अपनी इच्छा और क्षमता के अनुसार राशि डालते थे।
डॉ. केडिया की सेवा भावना का प्रभाव उनके परिवार पर भी साफ दिखाई देता है। उनकी तीन बेटियां डॉक्टर हैं, जिनमें से दो ने कोरोना काल में नौकरी छोड़ने की इच्छा जताई थी। उस समय डॉ. केडिया ने उन्हें समझाया कि डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म मरीजों की सेवा करना है। आज उनकी बेटियां भी उसी सोच के साथ चिकित्सा सेवा में जुटी हैं।
100 किलोमीटर दूर से सिर्फ इलाज के भरोसे
डॉ. केडिया की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूर्णिया के अमौर और आसपास के इलाकों के कई मरीज स्थानीय इलाज के बजाय करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय कर भागलपुर पहुंचते हैं। वे समय-समय पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित करते हैं, जहां मरीजों को मुफ्त जांच, परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। डॉ. पी. राम केडिया की कहानी बताती है कि चिकित्सा की सबसे बड़ी ताकत आधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि इंसानियत और सेवा का भाव है।
















