


आबादी बोली – अंडरपास नहीं तो आंदोलन जारी
कहलगांव के कुशहा और चाय टोला में फोरलेन निर्माण पर नया विवाद, विधायक ने मंत्री को लिखा पत्र; अंडरपास, सर्विस लेन और गोलंबर की उठाई मांग।कहलगांव के विधायक इंजीनियर शुभानंद मुकेश ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पथ निर्माण मंत्री को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कहलगांव (भागलपुर)। विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए बन रहा फोरलेन अब कहलगांव के ग्रामीणों के लिए नई परेशानी बनता जा रहा है। निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग ने कुशहा गांव को इस तरह दो हिस्सों में बांट दिया है कि एक तरफ लोगों के घर हैं, तो दूसरी ओर उनकी पूरी खेती। नतीजा यह है कि किसानों के सामने अपने ही खेत तक पहुंचने का संकट खड़ा हो गया है।
कहलगांव के विधायक इंजीनियर शुभानंद मुकेश ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पथ निर्माण मंत्री को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि समय रहते तकनीकी सुधार नहीं किए गए तो यह सड़क ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि स्थायी परेशानी और दुर्घटनाओं का कारण बन जाएगी।
कुशहा गांव की आबादी तीन हजार से अधिक है। ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन बनने के बाद ट्रैक्टर, थ्रेशर और अन्य कृषि यंत्र लेकर खेत तक पहुंचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचेगा। फिलहाल निकटतम अंडरपास 3 से 5 किलोमीटर दूर है, जिससे रोज खेती करना लगभग असंभव हो जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआत में यहां अंडरपास, सर्विस लेन और गोलंबर बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी के विरोध में 2 जुलाई से गांव में शांतिपूर्ण आंदोलन जारी है।
वहीं, धनौरा पंचायत के चाय टोला में दो प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्ग फोरलेन से जुड़ते हैं, लेकिन यहां सुरक्षित इंटर-कनेक्टिविटी की व्यवस्था नहीं की जा रही है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि भविष्य में यह स्थान बड़ा दुर्घटना क्षेत्र बन सकता है।
विधायक ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि कुशहा में तत्काल वाहन अंडरपास बनाया जाए, दोनों ओर कम से कम 5.5 मीटर चौड़ी सर्विस लेन विकसित की जाए तथा कुशहा और चाय टोला दोनों स्थानों पर भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुरूप गोलंबर का निर्माण कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि एनएचएआई और पथ निर्माण विभाग की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करे और जब तक डिजाइन में आवश्यक बदलाव नहीं हो जाते, तब तक प्रभावित हिस्से का निर्माण कार्य रोका जाए।
खास बात:
ग्रामीणों का सवाल है – जब रेलवे अपने ट्रैक के नीचे अंडरपास बना सकता है, तो निर्माणाधीन फोरलेन में ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती? यही सवाल अब स्थानीय आंदोलन को नई धार दे रहा है।
















