


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर की धरती ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के बोर्ड में निदेशक के रूप में अपनी कार्यकुशलता का परिचय देने वाले रंगरा (भागलपुर) के दिवंगत अनिरुद्ध ठाकुर के छोटे पुत्र कृष्ण कुमार ठाकुर को अब देश की अग्रणी खनन कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड में निदेशक (कार्मिक) नियुक्त किया गया है। भारत सरकार की मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति (एसीसी) ने इस्पात मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उनकी नियुक्ति पर मुहर लगा दी है। यह उपलब्धि न केवल भागलपुर बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
भेल में शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम:
कृष्ण कुमार ठाकुर वर्ष 2023 से भेल के बोर्ड में निदेशक के रूप में कार्यरत थे। उनके कार्यकाल में कंपनी ने मानव संसाधन प्रबंधन, प्रशासनिक सुधार और कार्य संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। इस दौरान भेल को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिले, जिन्हें उन्होंने कंपनी की ओर से स्वीकार किया। अब उनकी प्रशासनिक क्षमता और लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें एनएमडीसी जैसे महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संस्कृत के छात्र से केंद्रीय उपक्रम के शीर्ष पद तक
नवगछिया के रंगरा गांव निवासी कृष्ण कुमार ठाकुर की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पकरा हाई स्कूल से प्राप्त की, जहां उनके पिता स्वर्गीय अनिरुद्ध ठाकुर प्रधानाध्यापक थे। संस्कृत विषय के प्रति विशेष लगाव रखने वाले कृष्ण कुमार ठाकुर ने टीएनबी कॉलेज, भागलपुर से संस्कृत में प्रथम श्रेणी से स्नातक तथा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में ही स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से मानव संसाधन प्रबंधन (पीजीडीएम-एचआर) में विशेषज्ञता हासिल की।
रेलवे से भेल और अब एनएमडीसी तक:
कृष्ण कुमार ठाकुर भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (आईआरपीएस) के 1998 बैच के अधिकारी हैं। रेलवे सेवा के दौरान उन्होंने सोलापुर, भोपाल और मुंबई सहित कई महत्वपूर्ण मंडलों में मानव संसाधन एवं प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली। भेल में आने से पहले वे मध्य रेलवे में मानव संसाधन और प्रशासन के प्रमुख पद पर कार्यरत थे। उनके पास भारतीय रेलवे और विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में 25 वर्षों से अधिक का व्यापक प्रशासनिक अनुभव है।
सऊदी अरब में भी निभाई अहम भूमिका
अपने करियर के दौरान राइट्स के साथ प्रतिनियुक्ति पर उन्होंने सऊदी अरब की एक अंतरराष्ट्रीय ट्रेन ऑपरेशन परियोजना में भी काम किया। वहां कार्य वीजा (इकामा) जारी कराने, मानव संसाधन जुटाने और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके नेतृत्व में परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हुई और ग्राहकों की अपेक्षाओं पर खरी उतरी।
दस भाई-बहनों में सबसे छोटे:
कृष्ण कुमार ठाकुर दस भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई प्रो. अशोक ठाकुर मधेपुरा विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार हैं, जबकि भाई दीपक ठाकुर नवगछिया व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ता हैं। परिवार की शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि ने भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भागलपुर के लिए गौरव का क्षण:
संस्कृत जैसे पारंपरिक विषय से शिक्षा लेकर देश के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने वाले कृष्ण कुमार ठाकुर ने यह साबित कर दिया है कि लगन, मेहनत और प्रशासनिक दक्षता के बल पर किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं। एनएमडीसी में उनकी नियुक्ति से भागलपुर और बिहार के लोगों में खुशी का माहौल है और इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
















