


भागलपुर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के नेचर क्लब एवं उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को “अपशिष्ट से समृद्धि, मिशन आम गुठली कार्यशाला” का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) डी.आर. सिंह ने हरित ध्वज दिखाकर किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. (डॉ.) डी.आर. सिंह ने कहा कि आम की गुठली कोई अपशिष्ट नहीं, बल्कि एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है। यदि इसे वैज्ञानिक तरीके से एकत्रित एवं प्रसंस्कृत किया जाए तो इससे खाद्य, औद्योगिक, न्यूट्रास्यूटिकल, कॉस्मेटिक तथा अन्य जैव-आधारित उच्च मूल्य के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपशिष्ट को संपदा में बदलना सतत एवं आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार एवं भागलपुर जिले के लोगों से अपील की कि आम खाने के बाद गुठलियों को फेंकने के बजाय उन्हें अच्छी तरह साफ कर छाया में सुखाएं और अपने निकटतम संग्रह केंद्र पर जमा करें। उन्होंने बताया कि नेचर क्लब द्वारा निर्धारित समय पर इन संग्रह केंद्रों से गुठलियों का संग्रह किया जाएगा, जिसके बाद उनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन किया जाएगा।
कार्यशाला में विश्वविद्यालय के डीन, निदेशक, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के प्राचार्य, नेचर क्लब के सदस्य, उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग एवं फल प्रौद्योगिकी के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान आम की गुठली के वैज्ञानिक उपयोग, संग्रहण, प्रसंस्करण तथा “वेस्ट टू वेल्थ” (Waste to Wealth) की अवधारणा पर विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आय एवं रोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
कुलपति ने कहा कि यह जन-जागरूकता अभियान केवल बिहार कृषि विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे सबौर नगर एवं भागलपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़कर अपशिष्ट को समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बना सकें।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. एम.ए. आफताब, अध्यक्ष, उद्यान (फसलोत्तर प्रबंधन) विभाग, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर एवं नेचर क्लब के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
















