


@ सी-आर्म तकनीक से पहली बार बिना बड़ा चीरा लगाए टूटी हड्डी का सफल ऑपरेशन, गरीब मरीजों के लिए आधुनिक इलाज का खुला रास्ता।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर।सरकारी अस्पतालों को अक्सर सीमित संसाधनों और पारंपरिक इलाज से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन भागलपुर के मॉडल सदर अस्पताल ने इस धारणा को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अस्पताल में पहली बार सी-आर्म मशीन की मदद से बिना बड़ा चीरा लगाए हाथ की टूटी हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल, बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है।
अब तक इस तरह की अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी मुख्य रूप से निजी अस्पतालों तक सीमित थी, जहां इलाज का खर्च आम लोगों की पहुंच से बाहर होता था। मॉडल सदर अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से अब आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी सरकारी व्यवस्था में आधुनिक और सुरक्षित इलाज का लाभ उठा सकेंगे।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार गुप्ता और उनकी टीम ने सी-आर्म तकनीक की सहायता से टूटी हुई हड्डी को बिना बड़ा चीरा लगाए सही स्थिति में स्थापित किया। ऑपरेशन के दौरान स्क्रीन पर हड्डी की सटीक स्थिति दिखाई देती रही, जिससे सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और कम दर्दनाक बनी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से संक्रमण और रक्तस्राव का खतरा कम रहता है, मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी अपेक्षाकृत तेज होती है। यही कारण है कि दुनिया भर में आधुनिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी में सी-आर्म तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
मॉडल सदर अस्पताल के प्रभारी डॉ. राजू ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के बाद अस्पताल ने कम समय में सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर हड्डी के ऑपरेशन की सुविधा शुरू की। विभाग को दिए गए एक सप्ताह के वादे के भीतर पहला सफल ऑपरेशन कर सेवा का शुभारंभ किया गया।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सफल सर्जरी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव की शुरुआत है। आने वाले दिनों में अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सेवाओं का और विस्तार किया जाएगा, ताकि गंभीर हड्डी संबंधी चोटों का इलाज भी स्थानीय स्तर पर हो सके और मरीजों को निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज के परिजनों ने चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना था कि निजी अस्पताल में ऑपरेशन का खर्च वहन करना संभव नहीं था, लेकिन सरकारी अस्पताल में आधुनिक सुविधा मिलने से उनके बच्चे का इलाज समय पर और बिना आर्थिक बोझ के हो सका। यह सफलता उन हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
















