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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में आयोजित 29वीं प्रसार शिक्षा परिषद् (Extension Education Council) की बैठक में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार को किसानों की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक की खास बात यह रही कि पारंपरिक योजनाओं से आगे बढ़ते हुए विश्वविद्यालय ने किसानों तक तकनीक पहुंचाने के लिए कई अभिनव मॉडल पेश किए।
बैठक में भारत सरकार के पूर्व योजना आयोग के पूर्व सलाहकार डॉ. वी. वी. सदामते, पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डॉ. आर. एन. पडारिया (वर्चुअल माध्यम से), ATARI पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी. वी. सिंह तथा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एन. एस. दहिया ने कृषि प्रसार, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), जलवायु अनुकूल खेती, कृषि उद्यमिता और किसानों तक नई तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण पर अपने विचार रखे।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्रों को BAU की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए ‘One Student–One Farmer–One Solution’, ‘One KVK–One Signature Village’, ‘Farmer Innovation District’, ‘FPO Training Centre’, ‘BAU Kisan Samasya Bank’, ‘Smart Kitchen Garden’ और किसान मेंटरशिप कार्यक्रम जैसे नवाचारों को धरातल पर उतारने का आह्वान किया। उनका कहना था कि इन पहलों से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के बीच मजबूत सेतु तैयार होगा।
बैठक के दौरान ‘कृषक संदेश’ (खरीफ अंक-2026), ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ रिपोर्ट तथा ‘इम्पैक्ट रिपोर्ट 2025-26’ का भी विमोचन किया गया। परिषद् ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें तेजी से खेतों तक पहुंचें, ताकि किसानों की आय बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

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