


महादेवपुर घाट पर गंगा में डूब रहे अधेड़ की बची जान, गोताखोरों और डायल 112 की तत्परता से समय पर मिला जीवनदान
मधेपुरा निवासी लखन यादव की अस्पताल में हुई पहचान, पत्नी से विवाद के बाद घर से निकले थे

नवगछिया। महादेवपुर घाट पर शुक्रवार शाम एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने एक बार फिर कहावत “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई” को चरितार्थ कर दिया। गंगा नदी में बह रहे एक 55 वर्षीय अधेड़ को स्थानीय गोताखोरों ने साहस का परिचय देते हुए बाहर निकाला। समय पर डायल 112 पुलिस की सक्रियता और अस्पताल में तत्काल उपचार मिलने से उसकी जान बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परबत्ता थाना क्षेत्र के जाह्नवी चौक के समीप महादेवपुर घाट पर स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को गंगा की तेज धारा में बहते देखा। पहले लोगों को लगा कि उसकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन स्थानीय गोताखोरों ने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगाकर उसे बाहर निकाला। बाहर लाने पर उसकी सांसें चल रही थीं, जिसके बाद तत्काल डायल 112 को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और गंभीर अवस्था में मिले व्यक्ति को लगभग 10 मिनट के भीतर अनुमंडल अस्पताल, नवगछिया पहुंचाया। डायल 112 के पदाधिकारी राहुल राज एवं वाहन चालक चंद्रशेखर यादव की तत्परता के कारण समय पर इलाज शुरू हो सका, जिससे उसकी जान बच गई।
अनुमंडल अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में तैनात चिकित्सक डॉ. हैंपर कुमार एवं उनकी टीम ने घायल व्यक्ति का प्राथमिक उपचार किया। बाद में उसकी पहचान मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र के खारी गांव निवासी 55 वर्षीय लखन यादव, पिता जयकृष्ण यादव के रूप में हुई।
घटना की सूचना मिलने पर अस्पताल पहुंचे लखन यादव के पुत्र ने बताया कि माता-पिता के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उनके पिता घर से नाराज होकर निकल गए थे। वे महादेवपुर घाट कैसे पहुंचे और गंगा नदी में कैसे चले गए, इसकी जानकारी परिवार को नहीं है। पुलिस की सूचना मिलने के बाद ही उन्हें पूरी घटना की जानकारी मिली।
पुत्र ने अपने पिता की जान बचाने वाले स्थानीय गोताखोरों, नवगछिया पुलिस तथा डायल 112 की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। इधर, पुलिस मामले की जांच में जुटी है। स्थानीय लोगों ने भी गोताखोरों और डायल 112 की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यदि थोड़ी भी देर होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
















