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@ दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मीरनचक क्लस्टर को उसकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान केवल एक क्लस्टर की जीत नहीं, बल्कि भागलपुर के सिल्क, खादी उद्योग और यहां के हजारों बुनकरों की मेहनत, परंपरा और प्रतिभा का राष्ट्रीय सम्मान होगा।

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर भागलपुर के लिए गर्व की बड़ी खबर सामने आई है। देशभर के 72 हथकरघा क्लस्टरों के बीच आयोजित प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड स्थित मीरनचक क्लस्टर ने डिजाइनिंग श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल कर बिहार का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भागलपुर के विश्वप्रसिद्ध सिल्क एवं खादी उद्योग को नई पहचान और नई उड़ान दी है।
यह सफलता स्थानीय बुनकरों की वर्षों की मेहनत, उनकी पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक के सफल समन्वय का परिणाम मानी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मिली आर्थिक सहायता ने बुनकरों के कार्य को नई गति दी है। आधुनिक हथकरघों की स्थापना, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और आकर्षक डिजाइनों के विकास में सरकारी सहयोग निर्णायक साबित हुआ है।
बुनकरों ने बताया कि पहले ₹10,000 और बाद में ₹15,000 की आर्थिक सहायता मिलने से उनके कारोबार को मजबूती मिली। आधुनिक मशीनों और तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ा है, गुणवत्ता में सुधार हुआ है और अब कम समय में अधिक एवं बेहतर उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
स्थानीय बुनकर अमन अंसारी, मोहम्मद फरीद अंसारी, मोहम्मद अब्दुल कयूम और शमशेर अली ने कहा कि सरकारी सहयोग से अब काम पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। आधुनिक उपकरणों के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और भागलपुर का मशहूर सिल्क अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।
बुनकर सेवा सदन के उपनिदेशक राजेश चटर्जी ने इस उपलब्धि को पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि देशभर के 72 चयनित क्लस्टरों में मीरनचक का डिजाइनिंग में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर के बुनकर अपनी कला, नवाचार और गुणवत्ता के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं। उन्होंने इसका श्रेय बुनकरों की मेहनत और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दिया।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, भागलपुर में रंगोली एवं मंजूषा प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। कॉलेज के प्राचार्य के.के. पाठक ने कहा कि टेक्स्टाइल इंजीनियरिंग आज युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनकर उभर रही है तथा इस क्षेत्र में भविष्य की अपार संभावनाएं हैं।
सबसे गौरवपूर्ण बात यह है कि दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मीरनचक क्लस्टर को उसकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान केवल एक क्लस्टर की जीत नहीं, बल्कि भागलपुर के सिल्क, खादी उद्योग और यहां के हजारों बुनकरों की मेहनत, परंपरा और प्रतिभा का राष्ट्रीय सम्मान होगा।

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