


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को समझने और वर्तमान समय की चुनौतियों से जूझने की शिक्षा के रूप में आम लोगों तक पहुंचाने की एक अनूठी पहल अब पश्चिम बंगाल से निकलकर अंग प्रदेश तक पहुंचने जा रही है। बोलपुर, पश्चिम बंगाल में स्थापित गीता योग ट्रस्ट की ओर से अंग प्रदेश में भी गीता स्कूल शुरू करने की तैयारी की जा रही है। खास बात यह है कि इन स्कूलों में शिक्षा को किसी जाति, वर्ग या धर्म की सीमा में बांधने के बजाय सभी के लिए खुला रखने की योजना है।
ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार, भैरव चट्टोपाध्याय द्वारा स्थापित गीता योग ट्रस्ट पिछले कुछ समय से गीता की शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान में जुटा है। ट्रस्ट की पहल पर अब तक पांच जिलों में 52 गीता स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्कूलों में सप्ताह में एक दिन बच्चे, युवा, महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग एक साथ पहुंचकर गीता के विभिन्न पक्षों को समझते हैं।
स्कूल नहीं, संवाद और संस्कार का केंद्र:
इन गीता स्कूलों की अवधारणा पारंपरिक स्कूल से कुछ अलग बताई जा रही है। यहां नियमित पाठ्यक्रम और परीक्षा के बजाय गीता के विचारों, जीवन-दर्शन और उसकी वर्तमान संदर्भों में उपयोगिता पर चर्चा की जाती है

पांच स्थानों पर पुस्तकालय का उद्घाटन:
इसी अभियान के तहत वर्धमान और वीरभूम जिलों के पांच स्थानों – प्रांतिक, कापास टिकुरी, मोर बांध, इलाम बाजार और देरीपुर में गीता स्कूलों से जुड़े पुस्तकालयों का उद्घाटन किया गया। इन कार्यक्रमों में प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने भाग लिया और लोगों के साथ संवाद किया। प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने इन कार्यक्रमों के अनुभव को भावुक कर देने वाला बताया।
अब अंग प्रदेश की ओर नजर:
गीता योग ट्रस्ट के अनुरोध पर प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने अंग प्रदेश में गीता स्कूलों की स्थापना में सहयोग करने की सहमति जताई है। प्रस्तावित स्कूलों में भी सभी वर्गों के लोगों को गीता की शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अंग प्रदेश में गीता स्कूलों के माध्यम से धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता, कर्तव्य, आत्मअनुशासन और जीवन-दर्शन जैसे विषयों पर संवाद का एक नया मंच तैयार हो सकता है।
अंग प्रदेश में इस अभियान को जमीन पर उतारने के लिए गीता ट्रस्ट और चांद ट्रस्ट के बीच अनुबंध होने की बात भी सामने आ रही है। यदि यह समझौता होता है तो दोनों संस्थाएं मिलकर क्षेत्र में गीता स्कूलों की स्थापना और संचालन की दिशा में काम कर सकती हैं।
फिलहाल इस पहल को लेकर विस्तृत स्वरूप, स्कूलों की संख्या और स्थापना के स्थानों की अंतिम घोषणा का इंतजार है। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में 52 गीता स्कूलों के बाद अब अंग प्रदेश में भी गीता के विचारों को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है।
















