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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। अंग जनपद भागलपुर में तीन दिवसीय विषहरी पूजा की शुरुआत हो चुकी है। पुजा के अवसर पर आस्था और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। चंपानगर स्थित ऐतिहासिक मनसा देवी मंदिर सुबह से ही श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। सुबह की पहली किरण के साथ मंदिर में भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया और दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। कोई डलिया में पूजा सामग्री और चढ़ावा लेकर पहुंचा तो कोई पान, दूब और प्रसाद के साथ मनसा माई के दरबार में अपनी मन्नत लेकर आया।


विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की विशिष्ट लोकपरंपरा है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और लोककलाओं का भी समावेश होता है। इस अवसर पर आयोजित मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ लोक कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देते हैं। बिहुला-विषहरी की गाथा पर आधारित लोकगीत इस पर्व की आत्मा माने जाते हैं। भागलपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर विषहरी की प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है।
मन्नतों का मेला, श्रद्धा का सागर:
लोकविश्वास से जुड़े हजारों श्रद्धालु बिहार और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से मनसा देवी के दर्शन के लिए पहुंचे। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत मनसा माई पूरी करती हैं। भक्त डलिया चढ़ाकर अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।
सुबह करीब पांच बजे मंदिर के पुजारी संतोष झा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा-अर्चना शुरू कराई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खुले और दिनभर पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और लोकगाथा के स्वर वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग देते रहे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। मंदिर और आसपास के प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई। मंदिर परिसर और बाहरी क्षेत्र में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों से गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। भीड़ नियंत्रण के साथ महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
देर रात जीवंत होगी बिहुला-लखेंद्र की लोकगाथा:
विषहरी पूजा का सबसे आकर्षक और भावनात्मक पक्ष देर रात होने वाली बिहुला-लखेंद्र की विवाह लीला है। लोकगाथा के अनुसार बिहुला और लखेंद्र का विवाह होता है और इसके बाद आधी रात को सिंह नक्षत्र के प्रवेश के साथ लखेंद्र को नागदंश की रस्म निभाई जाती है।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की सदियों पुरानी लोकस्मृति का जीवंत मंचन है। बिहुला के प्रेम, संकल्प और संघर्ष की कथा आज भी लोगों को भावुक कर देती है। विवाह की रस्मों से लेकर नागदंश के प्रसंग तक श्रद्धालु देर रात तक इस लोकलीला के साक्षी बने रहते हैं। विशेष रूप से महिलाएं समूहों में पहुंचकर इस परंपरा को श्रद्धा के साथ देखती हैं।
चांदो सौदागर की कथा से जुड़ी परंपरा:
चंपानगर का मनसा देवी मंदिर बिहुला-विषहरी की लोकगाथा और चांदो सौदागर की परंपरा से गहराई से जुड़ा माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर परिसर में स्थापित प्राचीन शिवलिंग चांदो सौदागर की शिवभक्ति की स्मृति से जुड़ा है। मंदिर के उत्तरी हिस्से में स्थित इस शिवलिंग के दर्शन के लिए भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
बिहुला-विषहरी की लोकगाथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं है। इसमें प्रेम, नारी-संकल्प, आस्था, संघर्ष और प्रकृति के साथ मनुष्य के संबंध की गहरी लोकचेतना दिखाई देती है। यही कारण है कि सदियों बाद भी यह गाथा अंग क्षेत्र के जनजीवन में जीवित है।
राजकीय मेले की मांग:
विषहरी पूजा की व्यापकता और ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इतिहासकार राजेंद्र प्रसाद सिंह ‘गुरुजी’, शिव शंकर सिंह ‘पारिजात’, पत्रकार कुमार कृष्णन, टीएनबी कालेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डा रविशंकर चौधरी,अंग मदद फाउंडेशन की सचिव वंदना झा सहित स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक संगठनों की ओर से इसे राजकीय मेला घोषित करने की मांग उठाई जा रही है।
उनका कहना है कि विषहरी पूजा को राजकीय मेले का दर्जा मिलने से भागलपुर की विशिष्ट लोकसंस्कृति को संस्थागत पहचान मिलेगी। इससे बिहुला-विषहरी की लोकगाथा, मंजूषा कला और अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों को भी बल मिल सकता है।
वास्तव में विषहरी पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अंगभूमि की जीवित सांस्कृतिक विरासत है। इसमें लोकविश्वास, लोककला, संगीत, नाट्य, पारिवारिक परंपरा और सामुदायिक भागीदारी एक साथ दिखाई देती है। चंपानगर के मनसा मंदिर में उमड़ता श्रद्धा का यह सैलाब बताता है कि आधुनिक समय में भी लोकगाथाएं तभी जीवित रहती हैं, जब समाज उन्हें केवल सुनता नहीं, बल्कि हर वर्ष पूरे विश्वास के साथ जीता भी है।

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