


नवगछिया। लोक आस्था, अंगिका संस्कृति और बेटी के प्रति प्रेम का अद्भुत संगम सोमवार की शाम नवगछिया में देखने को मिला। सती बिहुला के अपने मायके आगमन के अवसर पर बाल भारती विद्यालय के समीप मुकेश राणा के घर स्थित बिहुला माता मंदिर में दो दिवसीय भव्य पूजा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 17 और 18 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम के पहले दिन मंदिर परिसर में भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति गीतों के साथ अंगिका के बेटी गीतों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

सती बिहुला के नवगछिया पहुंचने पर उनका स्वागत बेटी के रूप में किया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। महिलाओं ने डलिया चढ़ाकर विधि-विधान से माता की पूजा की। शाम होते ही मंदिर परिसर भक्ति और लोक संस्कृति के रंग में रंग गया। चंदन म्यूजिकल ग्रुप, नवगछिया की ओर से आयोजित भजन संध्या में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भक्ति एवं लोकगीत प्रस्तुत किए। माता बिहुला को समर्पित गीतों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब आमंत्रित गायिका मीनाक्षी ने अंगिका में बेटी के मायके लौटने की भावनाओं से जुड़ा गीत प्रस्तुत किया। बेटी और बाबुल के रिश्ते पर आधारित गीत की प्रस्तुति शुरू होते ही पूरा वातावरण भावनाओं से भर गया। गीत के माध्यम से बिहुला को बेटी के रूप में संबोधित किया गया। पंक्तियों में मायके की ममता, बाबुल का स्नेह और बेटी के लौटने की खुशी के साथ बिछोह की पीड़ा का भाव उभरकर सामने आया। प्रस्तुति के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और गायिका मीनाक्षी भी भावुक हो उठीं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। गीत समाप्त होते ही पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
बेटी के स्वागत के भाव को अंगिका लोकभाषा में स्वर देते हुए कार्यक्रम में मौलिक लोकपंक्तियां भी प्रस्तुत की गईं । भावपूर्ण पंक्तियों ने बिहुला के मायके आगमन को बेटी के स्वागत से जोड़ दिया। श्रद्धालुओं ने कहा कि बिहुला उनके लिए केवल एक लोकगाथा की पात्र नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की बेटी और बहन के समान हैं। यही कारण है कि उनके मायके आगमन पर नवगछिया में वर्षों से विशेष पूजा और स्वागत की परंपरा चली आ रही है।
लोकमान्यता के अनुसार सती बिहुला का मायका नवगछिया के उजानी गांव से जुड़ा है, जबकि उनकी ससुराल भागलपुर के नाथनगर स्थित चंपानगर से संबंधित मानी जाती है। 17 अगस्त को बिहुला के मायके आगमन की परंपरा को यहां बेटी के ससुराल से मायके लौटने के भाव से मनाया जाता है। इसी भावना के तहत लोग माता बिहुला का स्वागत करते हैं और उन्हें ससम्मान पूजा स्थल पर विराजमान कर पूजा-अर्चना करते हैं।
मुकेश राणा के घर स्थित बिहुला माता मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर माता को डलिया चढ़ाई। शाम में भजन संध्या शुरू होने के बाद मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया। भक्ति गीतों, लोकगीतों और बेटी के गीतों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोकगायक धीरज सोनी ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। मीनाक्षी और धीरज सोनी की प्रस्तुतियों पर लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। कभी भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हुआ तो कभी अंगिका लोकगीतों ने लोगों को अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़ दिया।
संगीत संयोजन में की-बोर्ड पर प्रकाश कुमार एवं सोनू कुमार, ढोलक पर चंदन म्यूजिकल ग्रुप के संचालक चंदन कुमार तथा पैड पर गोलू कुमार ने अपनी भूमिका निभाई। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रदीप कुमार ने किया। कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति और वाद्ययंत्रों की संगत ने भजन संध्या को यादगार बना दिया।
आयोजक मुकेश राणा ने कहा कि वे पांच भाई हैं और उनकी कोई बहन नहीं है। उनके लिए माता बिहुला बहन के स्वरूप में हैं। इसी भाव के साथ वे और उनके परिवार के सदस्य प्रत्येक वर्ष बिहुला माता के आगमन पर उनका भव्य स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मायके लौटने वाली बेटी का पूरा परिवार प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत करता है, उसी भावना से बिहुला माता का स्वागत किया जाता है। यह आयोजन उनके लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बहन और बेटी के प्रति प्रेम एवं सम्मान की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि बिहुला की लोकगाथा अंग क्षेत्र की पहचान और गौरव से जुड़ी हुई है। आज के दौर में लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों को जीवित रखना बेहद जरूरी है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
आयोजन में भक्ति के साथ बेटी के सम्मान का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। जब गायिका मीनाक्षी ने बेटी के गीत की प्रस्तुति दी तो वहां मौजूद लोगों को अपने घर की बेटियों और बहनों की याद आ गई। भावपूर्ण गीत और उसकी मार्मिक प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह भावुक कर दिया। कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो पूरा मंदिर परिसर किसी बेटी के मायके लौटने की खुशी और उससे जुड़े भावनात्मक क्षणों का साक्षी बन गया हो।
चंदन म्यूजिकल ग्रुप, नवगछिया-भागलपुर की ओर से आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम 18 अगस्त को भी जारी रहेगा। दूसरे दिन पूजा-अर्चना के साथ अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे तथा शाम को विसर्जन यात्रा के साथ आयोजन का समापन किया जाएगा। सती बिहुला के मायके आगमन के कारण नवगछिया में इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और अंगिका लोक संस्कृति का अनूठा रंग देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के क्षेत्र तक भक्ति गीतों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है।
















