


हालांकि उनकी शिवभक्ति का यह सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 1998 से सावन के प्रत्येक सोमवार को वह सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचती हैं और जलाभिषेक करती हैं।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। पीठ पर गंगाजल से भरी गगरी… कंठ में गूंजता ‘बोल-बम’… आंखों में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की आस और कदमों में ऐसी रफ्तार, जिसे देखकर उम्र भी मानो ठिठक जाए। सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाकर देवघर की ओर बढ़ते डाक बमों के कारवां में धनबाद की 60 वर्षीय रेणु देवी एक बार फिर आस्था की मिसाल बनकर दौड़ पड़ी हैं। यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि 28 वर्षों से जारी वह संकल्प है, जिसमें उम्र पीछे छूट गई और महादेव के प्रति विश्वास आगे बढ़ता रहा। पूर्व की तरह इस बार भी रेणु बम के साथ कांवडियों का हुजूम इसके साथ चल पड़े हैं। रेणु बम सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहती है। घर यानी धनबाद से निकलते, अपनी यात्रा शुरू करने सहित सम्पूर्ण यात्रा की सूचना पल-पल सोशल मीडिया पर चस्पा करती रहती है।

चौथी बार नहीं, 28 वर्षों से हर सोमवारी की साधना:
रेणु देवी इस सावन माह में लगातार चौथी बार डाक बम के रूप में सुल्तानगंज से देवघर की यात्रा पर निकली हैं। हालांकि उनकी शिवभक्ति का यह सिलसिला नया नहीं है। वर्ष 1998 से सावन के प्रत्येक सोमवार को वह सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचती हैं और जलाभिषेक करती हैं।
करीब 105 किलोमीटर की यह कठिन यात्रा डाक बम श्रद्धालु आमतौर पर 18 से 20 घंटे में पूरी करते हैं। रेणु देवी के लिए यह दूरी महज किलोमीटर का आंकड़ा नहीं, बल्कि बाबा के प्रति समर्पण की वह राह है, जिस पर हर कदम एक प्रार्थना बन जाता है।
पति ने कहा – डाक बम बनकर चलो, डर गई थीं रेणु
रेणु देवी की डाक बम यात्रा की शुरुआत भी किसी कहानी से कम नहीं। वह बताती हैं कि वर्ष 1998 में उनके पति राम बच्चन सिंह उन्हें सामान्य कांवर यात्रा के लिए सुल्तानगंज लेकर गए थे। वहां पहुंचने के बाद अचानक उन्होंने डाक बम बनकर देवघर जाने को कहा। डाक बम यात्रा का नाम सुनते ही रेणु देवी घबरा गईं और रोने लगीं।
लेकिन पति का हौसला और बाबा भोलेनाथ पर अटूट विश्वास आखिरकार उनके डर पर भारी पड़ा। उन्होंने कदम बढ़ाया और कठिन यात्रा पूरी कर ली।
जो सफर उस दिन डरते-डरते शुरू हुआ था, वही आज 28 वर्षों की अखंड आस्था बन चुका है।

‘बाबा का बुलावा आ गया है…’ सावन आते ही रेणु देवी के भीतर जैसे एक अलग ऊर्जा जाग उठती है। उनका कहना है कि यह यात्रा उनके लिए महज पैदल चलना नहीं, बल्कि तपस्या है।
पैरों में छाले हों, शरीर थक जाए, मौसम परीक्षा ले या रास्ता कठिन हो जाए – आस्था का कारवां नहीं रुकता। कांवर में गंगाजल और हृदय में महादेव का नाम लेकर डाक बम आगे बढ़ते रहते हैं।
रेणु देवी के लिए भी हर सावन एक ही संदेश लेकर आता है – ‘बाबा का बुलावा आ गया है।’और फिर कदम खुद-ब-खुद सुल्तानगंज की ओर बढ़ जाते हैं।
जब रास्ते कठिन हुए, ‘बोल-बम’ ने बढ़ाई रफ्तार
सुल्तानगंज से देवघर की डाक बम यात्रा आसान नहीं है। लगातार दौड़ना, शरीर की थकान, पैरों में पड़ते छाले और बदलता मौसम – हर पल श्रद्धालुओं की परीक्षा लेता है।
कृष्णा बम के बाद अब रेणु देवी की भक्ति बनी चर्चा का केंद्र:
सावन की डाक बम यात्रा जब भी अपनी अनूठी कहानियों के लिए याद की जाती है, तो कृष्णा बम की शिवभक्ति का उदाहरण भी सामने आता है। लंबे समय से उनकी यात्रा श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र रही है। अब धनबाद की रेणु देवी की निरंतर साधना भी शिवभक्तों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों की भक्ति की अपनी अलग कहानी है, लेकिन संदेश एक ही है – जब महादेव पर विश्वास अटूट हो, तो उम्र, थकान और कठिन रास्ते भी आस्था के आगे छोटे पड़ जाते हैं।
28 साल की आस्था… और हर सोमवार बाबा के नाम:
1998 से शुरू हुई रेणु देवी की यात्रा अब करीब तीन दशक की आस्था में बदल चुकी है। इस दौरान न जाने कितने सावन आए और चले गए, कितनी सोमवारी बीतीं, मौसम बदले, परिस्थितियां बदलीं और पीढ़ियां बदल गईं लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पहुंचने का उनका संकल्प नहीं बदला।
सावन की इस सोमवारी पर जब सुल्तानगंज से देवघर की ओर डाक बमों का कारवां दौड़ रहा है, उसी कारवां में रेणु देवी की आस्था भी दौड़ रही है।
उम्र 60 साल है, लेकिन कदमों में अब भी वही विश्वास है। क्योंकि जब बुलावा महादेव का हो, तो उम्र नहीं देखी जाती… रास्ता नहीं देखा जाता… बस कदम बाबा की ओर बढ़ते चले जाते हैं।
















