


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। उम्र महज सात साल, लेकिन हौसला ऐसा कि बड़ों के कदम भी ठिठक जाएं। लखीसराय के संतर मोहल्ला निवासी नन्हे कृष्णा कुमार ने आस्था, संकल्प और अद्भुत जज़्बे की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कृष्णा कुमार, पिता वाल्मीकि मोदी, ने डाकबम बनकर सुल्तानगंज से गंगाजल उठाया और लगातार कठिन यात्रा करते हुए महज 15 घंटे में देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर जल अर्पित किया।
आमतौर पर डाकबम यात्रा को शारीरिक और मानसिक रूप से कठिन माना जाता है। ऐसे में महज सात वर्ष की उम्र में कृष्णा का इस यात्रा को पूरा करना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है।

नन्हे कदम, बड़ा संकल्प:
सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक की यात्रा में कृष्णा ने जिस लगन और अनुशासन का परिचय दिया, वह लोगों के लिए प्रेरणा बन गया। उनकी इस यात्रा में केवल दूरी तय करने का जज़्बा नहीं, बल्कि अपने संकल्प को पूरा करने की दृढ़ इच्छा भी नजर आई। कृष्णा की आस्था और साहस की चर्चा अब इलाके में हो रही है। लोग उनके जज़्बे की सराहना करते हुए इसे भोलेनाथ के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा से जोड़ रहे हैं।
आस्था की राह पर नन्हा यात्री:
कृष्णा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि जिस उम्र में बच्चे खेल-कूद और स्कूल की गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में उन्होंने कठिन धार्मिक यात्रा का संकल्प लेकर उसे पूरा किया।
सात साल के कृष्णा ने साबित कर दिया कि हौसले की उम्र नहीं होती। उनकी 15 घंटे की यह डाकबम यात्रा आस्था के साथ-साथ संकल्प, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की कहानी बन गई है।
















