


@ इंजीनियरों ने 2023 में ही बताया था गंगा के बढ़ते दबाव का खतरा, जमीन और फाइलों के फेर में अटका रहा 910 मीटर का सुरक्षा बांध।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने खरीक प्रखंड के काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध के ध्वस्त होने के बाद डाउनस्ट्रीम में राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का भी बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। राघोपुर बांध टूटने के बाद गंगा के उफान और कटाव से तबाही झेल रहे लोगों के बीच अब सिर्फ पानी का सवाल नहीं है, बल्कि उस चेतावनी का भी सवाल है जिसे समय रहते गंभीरता से लिया गया या नहीं। उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि जिस खतरे का असर आज गांवों और घरों पर दिखाई दे रहा है, उसकी आहट करीब तीन साल पहले ही मिल चुकी थी।

फरवरी 2023 में भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों की टीम ने विक्रमशिला सेतु का निरीक्षण किया था। 6 फरवरी 2023 की तकनीकी रिपोर्ट में साफ संकेत दिया गया था कि सेतु के नवगछिया छोर की ओर गंगा की धारा धीरे-धीरे उत्तर दिशा में खिसक रही है।
तकनीकी टीम ने इसे महज नदी के बहाव में बदलाव नहीं माना था। रिपोर्ट में विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ की भविष्य में सुरक्षा के लिए गंगा के उत्तरी तट को सुरक्षित करने की जरूरत बतायी गयी थी।
चेतावनी थी, लेकिन सुरक्षा जमीन पर नहीं उतरी
2023 की रिपोर्ट के बाद तट सुरक्षा को लेकर कार्रवाई आगे बढ़नी थी। लेकिन सुरक्षा योजना तकनीकी जरूरत से निकलकर जमीन की उपलब्धता और हस्तांतरण की प्रक्रिया में उलझ गयी।
नतीजा यह रहा कि प्रस्तावित सुरक्षा कार्य समय पर धरातल पर नहीं उतर सका। अब जब गंगा का कटाव और बाढ़ लोगों के घरों तक पहुंच चुका है, तब तीन साल पुरानी रिपोर्ट फिर सवालों के घेरे में है।
सबसे बड़ा सवाल यही है – अगर खतरे की पहचान पहले ही हो चुकी थी, तो उसके स्थायी समाधान के लिए कार्रवाई इतनी देर से क्यों हुई?
प्रस्तावित सुरक्षा योजना में गाइड बांध का निर्माण महत्वपूर्ण हिस्सा था। लेकिन इसके लिए रेलवे की जमीन की जरूरत सामने आयी। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, भागलपुर के कार्यपालक अभियंता ने नवंबर 2025 में सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र भेजकर रेलवे की जमीन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को हस्तांतरित करने का आग्रह किया।
यानी 2023 की तकनीकी चेतावनी के करीब ढाई साल बाद भी सुरक्षा योजना जमीन की उपलब्धता के सवाल से बाहर नहीं निकल सकी थी।
दिसंबर 2025 में डीएम से भी मांगी गयी कार्रवाई
मामला सिर्फ रेलवे तक सीमित नहीं रहा। दिसंबर 2025 में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल की ओर से जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा गया। इसमें संबंधित रेलवे भूमि को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को हस्तांतरित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया। लेकिन इसके बाद भी प्रस्तावित गाइड बांध का निर्माण नहीं हो सका।
अब बाढ़ और कटाव के बीच यही प्रक्रिया सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आ रही है – क्या जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त दबाव और लगातार फॉलोअप किया गया था?
विक्रमशिला सेतु के उत्तरी छोर से नवगछिया की तरफ महादेवपुर घाट तक अपस्ट्रीम में गाइड बांध बनाने की योजना तैयार की गयी थी। प्रस्ताव के मुताबिक करीब 910 मीटर लंबा और 22 मीटर चौड़ा गाइड बांध बनाया जाना था। इसका उद्देश्य नदी के दबाव और बहाव से संवेदनशील हिस्से को सुरक्षा देना था। इस योजना को लेकर 7 नवंबर 2025 को जल संसाधन विभाग और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण भी किया था। इसके बावजूद सुरक्षा संरचना का निर्माण समय पर शुरू नहीं हो सका।
आज कई परिवार बाढ़ और कटाव के बीच अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं। कई लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए अपना आशियाना खुद उजाड़ना पड़ रहा है। ऐसे में राघोपुर बांध टूटने की त्रासदी को सिर्फ प्राकृतिक आपदा मानकर आगे बढ़ जाना कई सवालों को अनुत्तरित छोड़ देगा। 2023 में खतरे की पहचान हुई। 2025 में जमीन के लिए पत्राचार हुआ। स्थल निरीक्षण भी हुआ लेकिन सुरक्षा बांध धरातल पर नहीं आया।
अब जांच का असली मुद्दा यही होना चाहिए कि इन तीन वर्षों के दौरान चेतावनी से कार्रवाई तक का सफर आखिर कहां रुकता रहा? गंगा का पानी उतर जाएगा, लेकिन अगर जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो फाइलों में दर्ज यह चेतावनी अगली बाढ़ के लिए फिर एक अधूरी चेतावनी बनकर रह जाएगी
















