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@ रोसड़ा के 15 नंबर वार्ड के युवा खिलाड़ी ने हासिल की 1630 रैपिड FIDE रेटिंग, शतरंज की पारिवारिक विरासत को पहुंचाया नई ऊंचाई पर

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर/रोसड़ा।
शतरंज की बिसात पर मोहरों की चाल भले छोटी हो, लेकिन सही चाल कभी-कभी पहचान बहुत बड़ी बना देती है। रोसड़ा नगर परिषद के वार्ड नंबर 15 निवासी वैभव विशाल झा ने भागलपुर में आयोजित शतरंज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए 1630 रैपिड अंतरराष्ट्रीय FIDE रेटिंग हासिल कर ली है। इस उपलब्धि के साथ वैभव ने न केवल अपनी मेहनत का परिचय दिया, बल्कि परिवार से मिली शतरंज की विरासत को भी नई पहचान दी है।
वैभव की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके घर में शतरंज केवल खेल नहीं, बल्कि एक परंपरा की तरह मौजूद है। उनके पिता आनंद झा मध्य विद्यालय मुरादपुर में शिक्षक हैं और स्वयं पूर्व राष्ट्रीय स्तर के शतरंज खिलाड़ी रह चुके हैं। आनंद झा शतरंज के तीनों प्रमुख प्रारूप – स्टैंडर्ड, रैपिड और ब्लिट्ज में अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त खिलाड़ी हैं। ऐसे माहौल में पले-बढ़े वैभव ने पिता की बिसात से खेल की बारीकियां सीखीं और अब अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।


भागलपुर में आयोजित प्रतियोगिता वैभव के लिए खास साबित हुई। यहां उनके प्रदर्शन के आधार पर 1630 की रैपिड अंतरराष्ट्रीय रेटिंग दर्ज हुई। यह उपलब्धि उनके अब तक के प्रतियोगी सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
वैभव इससे पहले भी लगातार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहे हैं। समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया और भागलपुर में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई पुरस्कार अपने नाम किए हैं। ब्लॉक और जिला स्तर से आगे बढ़ते हुए राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
वैभव के परिवार में खेल का यह सिलसिला केवल उनके तक सीमित नहीं है। उनकी बहन अन्या झा भी सक्रिय खिलाड़ी हैं और राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। इससे साफ है कि परिवार में खेल के प्रति माहौल और प्रोत्साहन दोनों मौजूद हैं।
वैभव की सफलता के पीछे उनकी व्यक्तिगत मेहनत के साथ परिवार का निरंतर सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। दादा-दादी की पारिवारिक पृष्ठभूमि से लेकर पिता की शतरंज की विशेषज्ञता और बहन की खेल गतिविधियों तक, उन्हें ऐसा वातावरण मिला जिसमें प्रतियोगिता, अनुशासन और खेल भावना साथ-साथ आगे बढ़ती रही।
रोसड़ा से भागलपुर तक, अब नजर बड़ी बिसात पर
वैभव की यह उपलब्धि स्थानीय स्तर की सफलता भर नहीं है। 1630 रैपिड FIDE रेटिंग के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शतरंज की रेटिंग सूची में अपनी जगह बनाई है। अब उनकी निगाहें और बेहतर प्रदर्शन, रेटिंग में लगातार सुधार और बड़े मंचों पर पहचान बनाने पर होंगी।


एक तरफ पिता ने राष्ट्रीय स्तर पर शतरंज खेलकर परिवार में इस खेल की नींव मजबूत की, तो दूसरी तरफ बेटे वैभव ने उसी बिसात पर अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पहचान दर्ज कराई है। ऐसे में रोसड़ा के इस परिवार की शतरंज यात्रा अब एक खिलाड़ी की उपलब्धि से आगे बढ़कर आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा की कहानी बनती दिखाई दे रही है।

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