


@ कहलगांव से जमालपुर तक 24 घंटे निगरानी, हर घंटे दर्ज हो रहा जलस्तर; भागलपुर में डेरा डाले हैं रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियर।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा का पानी भले ही रेल पटरियों पर नहीं दौड़ रहा हो, लेकिन नदी के बढ़े जलस्तर ने रेलवे की रफ्तार जरूर थाम दी है। कहलगांव से भागलपुर होते हुए जमालपुर तक कई रेलवे पुलों पर बाढ़ का पानी खतरे के स्तर को पार कर चुका है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने संवेदनशील पुलों पर ट्रेनों की गति घटाकर 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी है। साथ ही पटरी और पुलों की निगरानी के लिए रेलवे की पूरी मशीनरी चौबीसों घंटे सक्रिय है।

पूर्व रेलवे ने मालदा मंडल के बाढ़ प्रभावित कहलगांव-भागलपुर-जमालपुर रेलखंड को संवेदनशील मानते हुए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की है। नदी किनारे के दो प्रमुख हिस्सों-कहलगांव-साबौर तथा सुल्तानगंज-रतनपुर पर इंजीनियरिंग टीमों की लगातार नजर है। बाढ़ के पानी को देखते हुए पुल संख्या 130, 135, 144ए, 181, 188, 195, 197 और 198 पर ट्रेनों के लिए 30 किलोमीटर प्रति घंटा की कॉशन स्पीड लागू की गई है। वहीं पुल संख्या 145ए पर अधिकतम 20 किलोमीटर प्रति घंटा की गति निर्धारित की गई है। यह व्यवस्था एहतियात के तौर पर लागू की गई है, ताकि जलस्तर अथवा पुल के आसपास की स्थिति में बदलाव होने पर यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित न हो।
रेलवे के अनुसार फिलहाल बाढ़ का पानी मुख्य रूप से बैकवॉटर के रूप में है और अधिकांश स्थानों पर तेज धारा नहीं है। हालांकि लैलखममलखा-सबौर क्षेत्र में जल प्रवाह को लेकर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
रेलवे ने संवेदनशील पुलों पर स्थायी वॉचमैन तैनात किए हैं, जो 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा पूरे बाढ़ प्रभावित रेलखंड में पेट्रोलमैन पैदल गश्त कर रहे हैं। जलस्तर में मामूली बदलाव भी नजर से न छूटे, इसके लिए स्थल पर पानी का स्तर हर घंटे दर्ज किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग से जलस्तर संबंधी आंकड़े भी हर चार घंटे में लिए जा रहे हैं। रेलवे अधिकारी जलस्तर के साथ-साथ पुलों के आसपास होने वाले स्कॉर यानी नींव के आसपास मिट्टी के कटाव, जलधारा और तटबंध की स्थिति पर भी नजर रख रहे हैं।
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भागलपुर में कैंप कर रहे हैं। मुख्य पुल इंजीनियर और मुख्य इंजीनियर/सामान्य के अलावा अनुभागीय वरिष्ठ मंडल इंजीनियर, सहायक मंडल इंजीनियर, स्थायी पथ निरीक्षक और निर्माण निरीक्षक लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। ट्रॉली और फुटप्लेट निरीक्षण के साथ पैदल जांच भी की जा रही है। इसमें रात का निरीक्षण भी अनिवार्य रखा गया है। रेलवे ने बरियारपुर में मानसून रिजर्व सामग्री, मशीनरी और अतिरिक्त मानवबल को आपात स्थिति के लिए तैयार रखा है। संवेदनशील स्थानों पर तट संरक्षण, सेस चौड़ीकरण और बल्ला पाइलिंग जैसे कार्य भी किए जा चुके हैं।
रेलवे ने साफ कर दिया है कि अभी स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन खतरा बढ़ने पर ट्रेनों की गति और कम की जा सकती है। यदि बाढ़ का पानी पुल के बेयरिंग लेवल के करीब पहुंचता है अथवा तेज जलधारा और स्कॉर की स्थिति बनती है, तो रेल यातायात को नियंत्रित करने या जरूरत पड़ने पर परिचालन रोकने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
केंद्रीय जल आयोग के 8 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.75 मीटर और भागलपुर में 0.92 मीटर ऊपर था। हालांकि ऊपरी इलाकों के कुछ स्थानों पर जलस्तर में गिरावट का रुख है, भागलपुर सहित कुछ क्षेत्रों में वृद्धि जारी रहने के कारण रेलवे ने अपनी चौकसी में कोई ढील नहीं दी है।
बाढ़ से तत्काल निपटने के साथ रेलवे ने स्थायी समाधान की दिशा में भी तैयारी शुरू कर दी है। पुल संख्या 195 की री-गर्डरिंग, उसे ऊंचा करने और उसके एप्रोच को भी ऊंचा करने का प्रस्ताव रखा गया है। पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाढ़ की स्थिति पर रेलवे की इंजीनियरिंग टीमें और वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाएंगे।

















