


@ राघोपुर में गुरुवार को दिखा खौफनाक मंजर, हैवी इंजन की कंपन से कटाव बढ़ने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप।.कुछ वर्ष पहले रानीदियारा में ड्रेजिंग मशीन के खिलाफ हुआ था ग्रामीणों का विरोध, बंद करना पड़ा था काम।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कटाव रोकने की कवायद के बीच राघोपुर में गुरुवार को नदी का किनारा फिर दरकने लगा। कटाव निरोधी कार्य में लगाए गए बड़े जहाज के हैवी इंजन के लगातार कंपन के बीच नदी किनारे मिट्टी के खिसकने का खौफनाक मंजर सामने आया। कटाव रोकने के लिए लाई गई भारी मशीनरी ही कहीं कटाव को न्योता तो नहीं दे रही – यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच जोर पकड़ने लगा है।
मालूम हो कि प्रारंभिक दौर में यानी जब गंगा उफान पर थी तो बड़े जहाज से कोई नुकसान नहीं हो रहा था अब जब पानी घट रहा है और कटाव थमा है तो यह खतरा होने लगा है। आगे ड्रेजिंग मशीन के जरिए गंगा की धारा को मोड़ने का भी काम होगा। इस मशीन के कारण कटाव का भीषण नजारा कहलगांव स्थित रानीदियारा के लोग पहले भी देख चुके हैं।

गुरुवार को नदी किनारे का दृश्य देखकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जहाज में लगे भारी इंजन के लगातार चलने से नदी के पानी में जबरदस्त कंपन और हलचल पैदा हो रही है। इसका सीधा असर नदी के संवेदनशील किनारे पर पड़ रहा है और मिट्टी तेजी से खिसक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां कटाव पर लगाम लगाने के लिए कार्य किया जा रहा है, वहीं भारी मशीन के संचालन के बाद किनारे पर कटाव की स्थिति फिर दिखाई देने लगी है।
कटाव रोकने की मशीनरी पर ही उठे सवाल:
राघोपुर में कटाव से बचाव के लिए बड़े जहाज को नदी में उतारा गया है। इसके मदद से ही कटाव स्थल पर भारी जियो बैग डाला जा रहा है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि मशीन के संचालन से नदी की धारा और किनारे की मिट्टी पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, तो यह कटाव निरोधी कार्य के उद्देश्य पर ही सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का किनारा पहले से ही बेहद संवेदनशील है। ऐसे में भारी इंजन के लगातार कंपन और उससे पैदा होने वाली जल-हलचल को नजरअंदाज करना भविष्य में भारी पड़ सकता है।
कुछ वर्ष पूर्व कहलगांव-पीरपैंती क्षेत्र के रानीदियारा में भी ड्रेजिंग मशीन के कारण कटाव की स्थिति पैदा होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया था। उस समय मशीन के संचालन को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश था। ग्रामीणों के विरोध के बाद अंततः वहां काम बंद करना पड़ा था। रानीदियारा की घटना को याद करते हुए ग्रामीणों का कहना है कि नदी के कटाव से बचाव के नाम पर ऐसी मशीनरी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा और किनारे की स्थिरता प्रभावित हो।
अधिकारियों से मौके पर जांच की मांग:
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जहाज के इंजन के कंपन और मशीनरी के संचालन से नदी की धारा तथा कटाव पर कितना असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम से नदी की धारा, मिट्टी की प्रकृति और जहाज के संचालन के प्रभाव का तकनीकी आकलन कराया जाए। साथ ही, जब तक स्थिति स्पष्ट न हो, तब तक ऐसे कार्यों को लेकर आवश्यक सावधानी बरती जाए।

















