


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर में गंगा इन दिनों अपने रौद्र रूप में है। घर – द्वार, खेत – खलिहान लील रही है। तेज धार, उफनती लहरें और किनारों पर लगातार हो रहा कटाव लोगों के लिए खतरे की घंटी बने हुए हैं। लेकिन नाबालिग बच्चों और कुछ युवाओं के लिए यही खौफनाक मंजर रोमांच का नया मैदान बन गया है। खतरे से बेखौफ युवा गंगा की विकराल धारा को चुनौती देने में जरा भी पीछे नहीं हट रहे।
ऊंचाई से छलांग, नीचे मौत का मंजर:
विक्रमशिला सेतु हो या भागलपुर के गंगा तटीय इलाकों के मंदिर, पुल- पुलिया जहां इन दिनों लबालब पानी और खतरनाक बहाव है वैसे स्थलों पर खासकर छोटे बच्चे की टोली खूब हुड़दंग मचा रहे हैं। ऊंचे स्थलों से खूब कूद फांद रहे हैं। ऐसे कई वायरल वीडियो ने प्रशासन की नींद हराम कर के रख दिया है। जिला प्रशासन द्वारा लगातार ऐसे स्थानों से खुद को बचाए रखने की हिदायत के बाद भी यह हुड़दंग रुक नहीं रहा है।

मंदिरों के ऊंचे गुंबद, ऊंचाई से गंगा की तेज धारा में छलांग लगाना कुछ युवाओं के लिए मानो रोजमर्रा का स्टंट बन गया है। कोई इसे रोमांच समझ रहा है तो कोई सोशल मीडिया पर वीडियो और लाइक्स की होड़ में अपनी जान जोखिम में डाल रहा है। नीचे गंगा की उफनती धार और ऊपर युवाओं का बेखौफ अंदाज – यह नजारा देखने वालों को भी हैरान कर रहा है।
गांवों में भी ‘एडवेंचर’ का जुनून:
शहरी इलाकों तक सीमित यह जुनून अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी नजर आ रहा है। गंगा किनारे युवाओं की टोलियां तेज धार के बीच धमाचौकड़ी करती दिखाई दे रही हैं। कोई लहरों से जूझता नजर आता है तो कोई एक-दूसरे को चुनौती देकर पानी में उतर रहा है।
रोमांच की कीमत कहीं जिंदगी न बन जाए:
गंगा की मौजूदा धार सामान्य दिनों से कहीं अधिक खतरनाक है। तेज बहाव में पानी के भीतर गहराई और भंवर का अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसे में कुछ सेकंड का रोमांच जिंदगी भर का पछतावा बन सकता है। प्रशासन और स्थानीय लोगों की चेतावनियों के बावजूद अगर यह सिलसिला जारी रहा तो हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
गंगा इस समय रोमांच का खेल नहीं, बल्कि बेहद खतरनाक चुनौती बनी हुई है। जरूरत है कि बच्चे, युवा ‘स्टंट’ और लाइक्स की होड़ से बाहर निकलकर इस रौद्र धारा की हकीकत को समझें – क्योंकि गंगा की लहरें मौका नहीं देतीं, सिर्फ बहा ले जाती हैं।
















