


@ एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से दहला कोयली खुटहा, बुधवार को भी चार ने गंवाई थी जान। कहीं गहरे पानी में डूबे, कहीं करंट बना काल तो कहीं राहत शिविर में थम गई सांस।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के उफान के बीच भागलपुर में बाढ़ अब सिर्फ घर-खेत और सड़कें नहीं डुबो रही, बल्कि जिंदगियां भी निगल रही है। महज 24 घंटे के भीतर बाढ़ और उससे जुड़े हादसों में 9 लोगों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। गुरुवार को बाईपास थाना क्षेत्र के कोयली खुटहा गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की डूबने से मौत हो गई। इससे ठीक एक दिन पहले भी जिले के अलग-अलग हिस्सों में पांच लोगों की जान चली गई थी।
गुरुवार का हादसा तो और भी हृदयविदारक रहा। कोयली खुटहा में सड़क पर जमा बाढ़ के पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होने से एक ही परिवार के लोग हादसे का शिकार हो गए। एक व्यक्ति को डूबता देख परिवार के दूसरे सदस्य उसे बचाने पानी में उतरे, लेकिन बचाने की कोशिश देखते ही देखते मौत के सिलसिले में बदल गई। एक के बाद एक पांच लोग गहरे पानी में समा गए। मृतकों में तीन महिलाएं शामिल हैं।
मृतकों की पहचान मंचों देवी, सोनाक्षी कुमारी, प्रिंस कुमार, अभिषेक कुमार और अंशु प्रिया के रूप में हुई है। एक अन्य व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद अस्पताल में परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।

बुधवार को भी पांच मौतें:
बाढ़ का कहर बुधवार को भी चार परिवारों पर टूटा था। नवगछिया के परबत्ता में पूर्व विधायक गोपाल मंडल के 18 वर्षीय भतीजे शुभम की डूबने से मौत हुई। पीरपैंती के एकचारी दियारा में तीन वर्षीय रूपेश की डूबने से मौत हो गई। अजगैवीनाथ धाम के बाढ़ग्रस्त फतेहपुर गांव में 16 वर्षीय रोहित कुमार की करंट लगने से जान चली गई। वहीं नाथनगर के बाढ़ राहत शिविर में रह रहे 76 वर्षीय रामदेव मंडल की मौत हो गई।
दो दिनों की यह तस्वीर बताती है कि बाढ़ का खतरा सिर्फ डूबने तक सीमित नहीं है। कहीं पानी की गहराई जानलेवा बन रही है, कहीं बिजली का करंट और कहीं बाढ़ के बीच स्वास्थ्य व उम्र से जुड़ी परेशानियां जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं।
पानी के नीचे छिपा है खतरा:
कोयली खुटहा की घटना ने बाढ़ग्रस्त इलाकों में आवाजाही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पानी से ढकी सड़क ऊपर से सामान्य दिखाई देती है, लेकिन उसके नीचे गड्ढा, नाला या अचानक बढ़ती गहराई जानलेवा साबित हो सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक कई जगह पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
9 मौतों ने चेताया है – बाढ़ का पानी सिर्फ रास्ता नहीं रोकता, लापरवाही की एक छोटी-सी गुंजाइश को भी जानलेवा बना सकता है। अब प्रशासन के सामने चुनौती पानी से घिरे इलाकों में लोगों की आवाजाही रोकने, खतरनाक स्थानों की पहचान करने और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने की है।

















