


@ रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ रहे बाढ़ पीड़ित बच्चे, प्रभारी मंत्री ने भी लिया प्रशिक्षण का जायजा।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर जिले में आई भीषण बाढ़ के बीच राहत शिविरों में आश्रय, भोजन और आवश्यक सुविधाओं के साथ बच्चों के मानसिक उत्साह और रचनात्मकता को बनाए रखने की दिशा में भी पहल की जा रही है। जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से तीन बाढ़ राहत शिविरों – चर्चगेट मैदान, पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान और टीएनबी कॉलेजिएट में बाढ़ पीड़ित बच्चों के लिए मंजूषा कला प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन के नेतृत्व में चल रही इस पहल का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देने के साथ उन्हें अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को मंजूषा चित्रकला की मूल तकनीकों के साथ बिहुला-विषहरी की लोकगाथा, मंजूषा कला की परंपरा और इसके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी जा रही है।
चर्चगेट मैदान में प्रशिक्षक विशुद्ध मिश्रा और हिना कुमारी, टीएनबी कॉलेजिएट में डॉ. उलूपी झा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में मंजूषा गुरु मनोज पंडित बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बच्चे पेंसिल और रंगों के माध्यम से मंजूषा कला की पारंपरिक आकृतियों एवं कथात्मक तत्वों को कागज पर उकेर रहे हैं। उनकी रचनाओं में कल्पनाशीलता और लोक कला के प्रति उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।
भागलपुर के प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने रविवार को चर्चगेट मैदान और पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान स्थित बाढ़ राहत शिविरों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मंजूषा कला का प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके द्वारा बनाए जा रहे चित्रों में विशेष रुचि दिखाई।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा कि कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन का प्रयास है कि समाज के हर वर्ग और हर परिस्थिति में रहने वाले लोगों तक कला एवं संस्कृति की पहुंच सुनिश्चित हो। जिला पदाधिकारी श्रीमती अलंकृता पाण्डेय के सकारात्मक निर्देश और मार्गदर्शन से इस पहल को धरातल पर उतारने का अवसर मिला है।
मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने कहा कि बाढ़ पीड़ित बच्चों से जुड़ना और उनकी सोच एवं संवेदनाओं को समझना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कठिन परिस्थितियों में बच्चों को अपनी संस्कृति और कला से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से बिहुला-विषहरी की लोकगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिल रहा है।
प्रशिक्षक डॉ. उलूपी झा ने इस पहल को अतुलनीय कहा। चर्चगेट के प्रशिक्षक हिना कुमारी और विशुद्ध मिश्रा ने बताया कि कुछ ही घंटों के प्रशिक्षण में बच्चों ने जिस उत्साह और कौशल का प्रदर्शन किया, वह उल्लेखनीय है। बच्चों ने पेंसिल और रंगों के जरिए अंग क्षेत्र की लोक कला को अपनी सहज रेखाओं में जीवंत कर दिया।
मंजूषा कला के माध्यम से बाढ़ पीड़ित बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने की यह पहल जहां अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही है, वहीं संकट की घड़ी में बच्चों के मन में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और उम्मीद के रंग भी भर रही है।

















